समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


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लोकमंगल का परमार्थ और उसके सहारे अपनी सत्प्रवृत्तियों का संवर्धन ही आराधना है।


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ಸಂಕ್ಷಿಪ್ತದಲ್ಲಿ ಇದು ಪರಮಾತ್ಮನಿಗೆ, ಈ ಬ್ರಹ್ಮಾಂಡದ ಸೃಷ್ಟಿಕರ್ತನಿಗೆ ನಮ್ಮ ಜೀವದ ಮೂಲ ಪ್ರಾಣನಿಗೆ, ಸಕಲ ಸಂಕಷ್ಟ ಮತ್ತು ನೋವನ್ನು ನಿವಾರಿಸುವವನಿಗೆ ಮತ್ತು ಸಂತೋಷವನ್ನು ಅನುಗ್ರಹಿಸುವವನಿಗೆ ದೈವಿಕತೆಯನ್ನು ಪ್ರಕಾಶತೆಯನ್ನು ನಮ್ಮೊಳಗೆ ದಿವ್ಯಾನುಗ್ರಹ ರೂಪದಲ್ಲಿ ಬೇರೂರಿಸಿ ತನ್ಮೂಲಕ ನಾವೂ ಪವಿತ್ರರಾಗಿ ಧರ್ಮಜ್ನಾನಿಗಳಾಗಲೂಹಾದಿ ತೋರುವವನಿಗೆ ಸಲ್ಲಿಸುವ ಪ್ರಾರ್ಥನೆಯಾಗಿದೆ.


ಪಂ. ಶ್ರೀರಾಮ ಶರ್ಮಾ ಆಚಾರ್ಯ


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अपना आदर्श उपस्थित करके ही दूसरों को सच्ची शिक्षा दी जा सकती है।


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It is through self-purification and self-introspection that a soul attains God-hood.


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अनुशासन का उल्लंघन न करें।


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तपस्या का अर्थ है- लोकमंगल का जीवन जीना, समाज, देश, संस्कृति के विकास, प्रगति के लिए श्रम करना, उसमें अपनी अक्ल, धन तथा, समय लगाना।


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ज्ञान का जितना भाग व्यवहार में लाया जा सके वही सार्थक है, अन्यथा वह गधे पर लदे बोझ के समान है।


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ज्ञान का अंतिम लक्ष्य चरित्र निर्माण ही है।


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सद्बुद्धि रूपी प्रसन्नता हमारे अन्तर में छिपी पडी़ है, उसे प्रेरित- प्रसन्न करते ही कष्टों की निशा समाप्त हो जाती है और आनन्द रूपी सूर्य की किरणें अपने चारों ओर बिखरी हुई दिखाई पड़ती हैं।


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किसी महान् उद्देश्य को न चलना उतनी लज्जा की बात नहीं होती, जितनी कि चलने के बाद कठिनाइयों के भय से पीछे हट जाना।


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जीवन एक पाठशाला है, जिसमें अनुभवों के आधार पर हम शिक्षा प्राप्त करते हैं।


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