समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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ज्ञान कहीं से, किसी से, किसी मूल्य पर मिले, लेना अच्छा है।


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संयमी और सदाचारी मनुष्य ही इस भूलोक के देवता हैं।


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बहुमूल्य वर्तमान का सदुपयोग कीजिए।


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ईश्वर के यहाँ देर है, अन्धेर नहीं।


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The man's real wealth is his thinking and not his money.


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स्वच्छता सभ्यता का प्रथम सोपान है।

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देवत्व का संस्कार प्रदान करने वाली नारी, स्रष्टा की विशेष कृति एवं शक्तिस्वरूपा है।


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नारी परिवार का हृदय है। परिवार का संपूर्ण अस्तित्व तथा वातावरण नारी पर- सुगृहिणी पर निर्भर करता है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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Do what is worth doing, think what is worth thinking on those who seem proper. Keep away from what seems improper.


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देश और भविष्य की सम्भावना देखनी है तो आज के बच्चों का स्तर देखो।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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महानता के लक्षण- सादा जीवन, उच्च विचार।


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