समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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In life two types of people meet failure: one who thinks right and does not follow up with action; the other, who does the actions without thinking.


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निर्धनता मनुष्य के लिए बेइज्जती का कारण नहीं हो सकती। यदि उसके पास वह सम्पत्ति मौजूद हो, जिसे सदाचार् कहते है।


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मानवता की सेवा से बढ़कर और कोई काम बड़ा नहीं हो सकता।


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आत्म- निर्माण का ही दूसरा नाम भाग्य निर्माण है।


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Don’t pay attention to what people say. Instead, see whether the goal that was worth attaining has been achieved or not.


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जिनके भीतर- बाहर एक ही बात है, वही निष्कपट व्यक्ति धन्य है।


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नारी परिवार का हृदय और प्राण है।


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परिश्रम ही स्वस्थ जीवन का मूलमंत्र है।


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आत्म- निरीक्षण द्वारा विकास का पथ खोज लेना ही सबसे बड़ा पुरुषार्थ है।


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जिस प्रकार राष्ट्र की जननी नारी, होगी, राष्ट्र भी उसी प्रकार का बनेगा।

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हमारी उपासना एक है- समर्पण की, श्रद्धा की। हमने नाले की तरह से अपने आपको नदी के साथ में मिला दिया है और उसमें मिल जाने की वजह से हमारी हैसियत, हमारी औकात, हमारी शक्ति और हमारा स्वरूप नदी जैसा बन गया है।


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