समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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భాధలను, వైఫల్యాలను అధిగమించి లక్ష్యం వైపు సాహసంతో పోరోగామించడమే గొప్పతనం.

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युग परिवर्तन की संभावना हमारी कल्पना नहीं, समय की प्रेरणा है। क्योंकि इसके बिना न व्यक्ति का कल्याण है और न विश्व का उद्धार संभव है।


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समय के सदुपयोग का नाम ही पुरुषार्थ है।


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संयम विहीन जीवन शुष्क एवं पशु के समान निःसार है।


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One who gives a practical shape to his inner virtues, achieves ultimate victory.


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स्वाध्याय को जीवन में निश्चित स्थान दें।


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आशा की ज्योति कभी बुझने न दें।


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मात्र हवन, धूपबत्ती और जप की संख्या के नाम पर प्रसन्न होकर आदमी की मनोकामना पूरी कर दिया करें, ऐसे देवी- देवता दुनिया में कहीं नहीं है।


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विषयों, व्यसनों और विलासों में सुख खोजना और पाने की आशा करना एक भयानक दुराशा है।


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आत्मानुशासन और आत्म- संतुलन का अभ्यास ही योग साधना है।


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समुन्नत नारी ही परिवार को स्वर्ग बना पाती है।


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