समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


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सत्कर्म ही लोक- परलोक की सुख- शान्ति का श्रेष्ठ साधन है।



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ಸೋಲುವುದೆಂದರೆ ಗೆಲುವಿಗಾಗಿ ಪೂರ್ಣ ಮನದಿಂದ ಪ್ರಯತ್ನ ಮಾಡದಿರುವುದು.



ಪಂ. ಶ್ರೀರಾಮ ಶರ್ಮಾ ಆಚಾರ್ಯ


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बिना पढ़े- लिखे का भविष्य अन्धकारमय है।


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दर्शन को बनाने वाली माँ का नाम है- ‘मनीषा’


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सन्ध्योपासना मनुष्य का परम आवश्यक धर्म कर्तव्य है।


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अपना सुधार संसार की सबसे बड़ी सेवा है ।


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महापुरुष किसी जाति या राष्ट्र के नहीं, बल्कि समस्त विश्व के।


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जो महापुरुष बनने के लिए प्रयत्नशील है, वे धन्य हैं।


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आलसी मनुष्य अपने आपका सबसे बड़ा शत्रु है।


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परिवार एक प्रयोगशाला, पाठशाला, व्यायामशाला अथवा एक ऐसी टकसाल है, जहाँ समर्थ राष्ट्र के लिए अभीष्ट महामानवों की ढलाई होती है।


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जो तुम दूसरों से चाहते हो, उसे पहले तुम स्वयं करो।


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