समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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मनुष्य के पास अपना कहलाने वाला जो कुछ है, वह नारी का अनुदान है।


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निरक्षर महिलाएँ साक्षर बनने का प्रयत्न करें।


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शान्ति के लिए प्रयत्न करना चाहिए और युद्ध करके भी उसे प्राप्त करना चाहिए और कभी- कभी बलप्रयोग से भी उसे स्थापित करना चाहिए। यह बात एक घर और एक राष्ट्र दोनों ही के लिए लागू है।



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सत्कर्म ही मनुष्य का कर्तव्य है।


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जीवन का अर्थ है -  समय जो जीवन से प्यार करते हों, वे आलस्य में समय न गँवाए


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खरे बनिए, खरा काम कीजिए और खरी बात कहिए।


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पुरूषों में मात्र दृष्टि होती है, बल्कि नारी में अन्तर्दृष्टि।


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आज के युग की सबसे बड़ी शक्ति शस्त्र नहीं, सद्विचार है।


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ईश्वर का अर्थ शासक होता है, जो दण्ड और पुरस्कार दोनों दे सकता है। अतः उसकी व्यवस्था के प्रति सतर्क एवं सावधान रहें।


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वीर्य संचित होने से मस्तिष्क में प्रबल शक्ति आती है और इस महती शक्ति के सहारे एकाग्रता साधन करना सहज हो जाता है।


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जिनकी तुम प्रशंसा करते हो, उनके गुणों को अपनाओ।


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