समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

मानवता एवं उत्कृष्टता का दूसरा नाम है- आस्तिकता। उपासना इसी का अभ्यास करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण विज्ञानसम्मत मानसिक व्यायाम है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

शान्तिकुंज एक विश्वविद्यालय है। कायाकल्प के लिए बनी एक अकादमी है। हमारी सतयुगी सपनों का महल है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

प्रयत्न करते रहने पर सफलता मिलती ही है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

निरक्षरता मनुष्य जीवन का बहुत बड़ा कलंक है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

ज्ञानार्जन का मूल उद्देश्य अनुभव और विवेक को विकसित करना है।



By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

आत्मा ही आत्मा का सहायक है। दूसरा और भला कौन सहायक हो सकता है? आत्म- संयम से मनुष्य दुर्लभ सहायता को प्राप्त कर लेता है।



By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

भाग्यवादी वह है, जो स्वयं में विश्वास नहीं करता।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

ज्ञान प्राप्ति के लिए निरन्तर प्रयत्नशील रहें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email


मानवता की सेवा से बढ़कर और कोई काम बड़ा नहीं हो सकता।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

The person, who has inculcated abundant live and generosity in one’ life, is verily the greatest artist.


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email

अभिमान एक नशा है, जो मनुष्य को अन्धा बना देता है।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
Share on Google+ Email