समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


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आदर्शों ने सदैव जीवन में उतारने के बाद फायदा ही पहुँचाया है, नुकसान किसी का नहीं किया।


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ईश्वर का अर्थ शासक होता है, जो दण्ड और पुरस्कार दोनों दे सकता है। अतः उसकी व्यवस्था के प्रति सतर्क एवं सावधान रहें।


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सौन्दर्य फैशन में नहीं, वरन् हृदय के आदर्श गुणों में है।


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नारी पुरुष की पूरक सत्ता है। वह मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। उसके बिना पुरुष का जीवन अपूर्ण है।


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शिक्षा का स्थान स्कूल हो सकते हैं, पर दीक्षा का स्थान तो घर ही है।


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नारी की प्रतिमा को निखारना एक पुण्यजनक अनुष्ठान है।


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अच्छे काम का प्रयोग अपने से ही आरम्भ करो।


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मनुष्य जन्म सरल है, पर मनुष्यता कठिन प्रयत्न करके कमानी पड़ती है।


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परमात्मा अहंकारी से जितना अप्रसन्न होता है उतना और किसी से नहीं।


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मनुष्य दीन- हीन बनता है, अपने ही कारण तथा ईश्वर के समकक्ष बनने का श्रेय पाता है, तो वह भी अपने ही कारण।


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जीवन और जगत् की प्रत्येक घटना को प्रभु की लीला- अनुकंपा मानकर चलना चाहिए। सुख- दुःख में, मान- अपमान में, लाभ- हानि में संतुलित व्यक्ति ही सुखी रहता है।



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