समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


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विश्व कल्याण का मार्ग है - नारी उत्थान।


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जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है- ईश्वर प्राप्ति।


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गृहस्थ एक प्रत्यक्ष स्वर्ग है, इसी धरती पर है। घर में सत्प्रवृत्तियों की फसल बोकर उससे सब कुछ पाया जा सकता है।


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सार्थक उपदेश वाणी से नहीं, अनुकरणीय आचरण से दिये जाते हैं।

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शिक्षक राष्ट्र मंदिर के कुशल शिल्पी हैं।


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उनसे दूर रहो, जो भविष्य को निराशाजनक बताते हैं।


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आप समय को नष्ट करेंगे तो समय भी आपको नष्ट कर देगा।


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वास्तविक सौन्दर्य के आधार हैं- स्वस्थ शरीर, निर्विकार मन और पवित्र आचरण।


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परमात्मा की सृष्टि का हर व्यक्ति समान है। चाहे उसका रंग, वर्ण, कुल और गोत्र कुछ भी क्यों न हो।


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प्रयत्न करते रहने पर सफलता मिलती ही है।


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अपनी स्वयं की स्वच्छता, अपने जीवन में सादगी तथा घर की सफाई, मरम्मत, सादगीपूर्ण सज्जा और सुव्यवस्था पर ध्यान रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है।


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