समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


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विचार ही जीवन का निर्माण करते हैं।


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दर्शन को बनाने वाली माँ का नाम है- ‘मनीषा’


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ईश्वर उपासना एक आवश्यक धर्म- कर्तव्य है।


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भाग्य को मनुष्य स्वयं बनाता है, ईश्वर नहीं।


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चरित्रवान् व्यक्ति ही सच्चे अर्थों में भवगद् भक्त हैं।


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ಒಳ್ಳೆಯ ಕಾರ್ಯವನ್ನು ಎಂದಿಗೂ ವ್ಯಾಪಾರಿ ದೃಷ್ಟಿಯಿಂದ ಮಾಡಬಾರದು ಅದನ್ನು ನೀವು ಕರ್ತವ್ಯವೆಂದು ತಿಳಿದು ಮಾಡಿದಾಗ ಮಾತ್ರ ತೃಪ್ತಿ ದೊರಕುತ್ತದೆ. ಒಳ್ಳೆಯದನ್ನೆ ಪ್ರತಿಫಲವಾಗಿ ಬಯಸುತ್ತಾ ಮಾಡುವ ಒಳ್ಳೆಯ ಕಾರ್ಯವು ಸಹ ನಿರಾಸೆ ಮತ್ತು ತೊಂದರೆಯನ್ನೆ ತರುತ್ತದೆ.


ಪಂ. ಶ್ರೀರಾಮ ಶರ್ಮಾ ಆಚಾರ್ಯ


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दूसरों के उपकार को स्मरण रखना सज्जनता का प्रथम चिह्न है।


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आत्मा का परिष्कृत रूप ही परमात्मा है।


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नारी आभूषणों से नहीं, वरन् अपने गुणों से सजती है।


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जिसका अपने मन पर काबू है, जिसका मन पूर्णतः स्वस्थ है, वह बीमार नहीं पड़ सकता।


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मनुष्य मात्र का यह कर्तव्य है कि नारी का शील सुरक्षित बनाए रखें, उसे स्वावलम्बी बनाएँ; ताकि वह अपनी विभूतियों का लाभ समाज को दे सके।


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