समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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शान्तिकुंज एक विश्वविद्यालय है। कायाकल्प के लिए बनी एक अकादमी है। हमारी सतयुगी सपनों का महल है।


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In life when man does everything with love, then he still feels thirsty to do more.


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भगवान् उन्हें ही सर्वाधिक प्यार करते हैं, जो तप- साधना की आत्म- प्रवंचना में न डूबे रहकर सेवा- साधना को सर्वोपरि मानते हैं।


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भगवान् जाति- पाँति को नहीं, कर्म को देखते हैं।


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श्रेष्ठता और संस्कृति का पहला गुण स्वच्छता है।

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वाक्शक्ति का दुरुपयोग न करें।


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आत्मा- परमात्मा का मिलन जीव का परम लक्ष्य है और यह उन्हीं में संभव हो पाता है, जिनमें अंतः से भक्ति तत्त्व का उदय होता है।


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परमात्मा को प्राप्त करने और प्रसन्न करने का मार्ग उसके नियमों पर चलना है।


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गंगा की गोद, हिमालय की छाया, ऋषि विश्वामित्र की तपःस्थली, अजस्र पाण ऊर्जा का उद्भव स्रोत गायत्री तीर्थ शान्तिकुंज जैसा जीवन्त स्थान गायत्री उपासना के लिए दूसरा ढूँढ सकना कठिन है।


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जीवन का हर क्षण उज्ज्वल भविष्य की संभावना लेकर आता है।


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मनुष्य जन्म सरल है, पर मनुष्यता कठिन प्रयत्न करके कमानी पड़ती है।


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