समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


By Pandit Shriram Sharma Acharya
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नारी मात्र को हम पवित्र दृष्टि से देखें।


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परमात्मा जिसके जीवन में कोई विशेष अभ्युदय- अनुग्रह करना चाहता है, उसकी बहुत- सी सुविधाओं को समाप्त कर दिया करता है।


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श्रम और तितिक्षा से शरीर मजबूत बनता है।


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ईश्वर प्राणस्वरूप है- प्राणों का देने वाला है, प्राणाधार है, इससे लाभ तभी होगा जब हम भी किसी के प्राणाधार बनें, अहिंसा का पालन करें।



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भगवान् उन्हें ही सर्वाधिक प्यार करते हैं, जो तप- साधना की आत्म- प्रवंचना में न डूबे रहकर सेवा- साधना को सर्वोपरि मानते हैं।


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पढ़ना- ज्ञान के नेत्र खोलने के लिए होता है;  नौकरी के लिए नहीं।


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One can stay in hell as if in heaven with a good book.


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नारी व्यक्ति, समाज तथा राष्ट्र की जननी ही नहीं, वह जगज्जननी है।


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A family knit together, by bonds of loving cooperation and mutual understanding, is a living model of heaven on earth.


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दूसरों के साथ सदैव नम्रता, मधुरता, सज्जनता, उदारता एवं सहृदयता का व्यवहार करें।

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वही उन्नति कर सकता है, जो स्वयं को उपदेश देता है।


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