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👉 आत्मचिंतन के क्षण 5 Dec 2019

■ गंगा गोमुख से निकलती है और जमुना जमुनोत्री से, नर्मदा का अवतरण अमरकंटक के एक छोटे से कुण्ड से होता है। मान सरोवर से ब्रह्मपुत्र निकलती है, शांतिकुंज ऐसे अनेकों प्रवाहों को प्रवाहित कर रहा है, जिसका प्रभाव न केवल भारत को वरन् समूचे विश्व को एक...View More

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👉 आत्मचिंतन के क्षण 4 Dec 2019

■ कठिनाइयों से, प्रतिकूलताओं से घिरे होने पर भी जीवन का वास्तविक प्रयोजन समझने वाले व्यक्ति कभी निराश नहीं होते, वे हर प्रकार की परिस्थितियों में अपने लक्ष्य से ही प्रेरणा प्राप्त करते तथा श्रेष्ठता के पथ पर क्रमशः आगे बढ़ते जाते हैं।

□ श्रम की उपयोगिता निःसन्देह...View More

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👉 आदर्शों की राह

आदर्शविहीन जीवन बस अन्तहीन भटकन है, जिसकी न कोई मंजिल है और न राह, यहाँ तक कि राही भी बेसुध-बेखबर है। ऐसे जीवन की दशा उस नाव की भाँति है, जिसका मल्लाह नदारद...View More

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👉 आत्मचिंतन के क्षण 3 Dec 2019

■ मानसिक शुद्धि, पवित्रता एवं एकाग्रता पर आधारित है, जिसका मन जितना पवित्र और शुद्ध होगा, उसके सकंल्प उतने ही बलवान् एवं प्रभावशाली होंगे। सन्त- महात्माओं के शाप, वरदान की चमत्कारी घटनाएँ उनकी...View More

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👉 जीवन का आनन्द

जीवन का आनन्द किसी वस्तु या परिस्थिति में नहीं, बल्कि जीने वाले के दृष्टिकोण में है। स्वयं अपने आप में है। क्या हमको मिला है- उसमें नहीं, बल्कि कैसे हम उसे अनुभव करते...View More

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👉 आत्मचिंतन के क्षण 2 Dec 2019

■ राष्ट्रपिता का मन्तव्य हर स्त्री- पुरुष जिन्दा रहने के लिए शरीर श्रम करें। मनुष्य को अपनी बुद्धि की शक्ति का उपयोग आजीविका या उससे भी ज्यादा प्राप्त करने के लिए ही नहीं,...View More

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👉 आत्मचिंतन के क्षण 1 Dec 2019

◆ शरीर, मन और बुद्धि तीनों में ही काम शक्ति क्रियाशील है। शौर्य, साहस पराक्रम, जीवट, उत्साह और उमंग उसकी ही विभिन्न भौतिक विशेषताएँ हैं। उत्कृष्ट विचारणाएँ उदात्त भाव सम्वेदनाएँ काम की आध्यात्मिक विशेषताएँ हैं। संयम और ऊर्ध्वगमन की साधना द्वार, काम, का रूपान्तरण होता है। रूपान्तरण का...View More

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👉 आत्मचिंतन के क्षण 27 Nov 2019

★ आशा आध्यात्मिक जीवन का शुभ आरम्भ है। आशावादी व्यक्ति सर्वत्र परमात्मा की सत्ता विराजमान देखता है। उसे सर्वत्र मंगलमय परमात्मा की मंगलदायककृपा बरसती दिखाई देती है। सच्ची शान्ति, सुख और सन्तोष मनुष्य की निराशावादी प्रवृत्ति के करण नहीं, अपने ऊपर अपनी शक्ति पर विश्वास करने से होता...View More

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👉 मन और आत्मा

मन: कल तो में भाग मिल्खा भाग फिल्म देखकर आया, उस फिल्म के किरदार ने मेरे अंदर बहुत ही अधिक ऊर्जा भर दी है, और अब मुझमे इतना साहस आ चुका है कि में कुछ भी करके दिखा सकता हूँ।

मन घर आया और फिल्म की ऊर्जा के विश्वास...View More

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👉 सद्गुरु का द्वार

चाहत सच्ची हो तो गहरी होती है, और यदि गहरी हो तो पूरी होती है। एक बूढ़ा साधु-भीख मांगने निकला था। बूढ़े होने के कारण उसे आँख से कम नजर आता था। सो वह अनजाने ही एक आश्रम के पास जाकर खड़ा हो गया और आवाज लगायी। किसी...View More

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👉 ॐकार का अनुभव

ॐकार दिव्य नाद है। यह परम संगीत है। सृष्टि के सभी स्वर इसमें पिरोए हैं। पेड़ों पर बैठे पखेरुओं का कलरव, उच्च हिम शिखरों पर छायी शान्ति, पहाड़ों से उतरते झरनों की मर्मर, वृक्षों से गुजरती हवाओं की सरसर, महासागरों में लहरों का तर्जन, आकाश में बादलों का...View More

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👉 विवेक:-

एक बार महावीर अपने पुत्र से कह रहे थे की एक बार मैं एक रेलवे स्टेशन पर बैठा था मेरे पास एक व्यक्ति और बैठा था हम दोनो बाते कर रहे थे उसने कहा की मुझे भी अमुक स्थान पर जाना है हम दोनो को एक ही स्थान...View More

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👉 आत्मचिंतन के क्षण 24 Nov 2019

★ सुख- दुःख हर तरह की परिस्थिति में सन्तुष्ट रहने को सन्तोष कहते हैं। कुसंस्कारों के परिशोधन एवं सुसंस्कारों के अभिवर्द्धन के लिए स्वेच्छापूर्वक जो कष्ट उठाया जाता है- वह तप कहलाता है। स्वयं के अध्ययन- विश्लेषण के लिए किया जाने वाला अध्यवसाय स्वाध्याय है। अपने चित्त को...View More

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👉 Gayatri Sadhna truth and distortions (Part 10)

Q.13. What are the basic aims of Gayatri Sadhana?

Ans. The science of Gayatri Upasana has been developed to help human beings in ridding themselves of base animal instincts and replace them with the divine virtues. Adherence to the laws of this science provides a Sadhak permanent...View More

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👉 जीवन दर्शन

आँखें बन्द हों तो पाँव अपने आप ही राह भटक जाते हैं। बन्द आँखें किए चलने वाले किसी गड्ढे में जा गिरें तो कोई अचरज नहीं है। भूलना-भटकना, गुमराह हो जाना, पग-पग पर ठोकरों से चोटिल होते रहना ही ऐसों की नियति है। इनसे यही कहना है कि...View More

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👉 कोयले का टुकड़ा

अमित एक मध्यम वर्गीय परिवार का लड़का था। वह बचपन से ही बड़ा आज्ञाकारी और मेहनती छात्र था। लेकिन जब से उसने कॉलेज में दाखिला लिया था उसका व्यवहार बदलने लगा था। अब ना तो वो पहले की तरह मेहनत करता और ना ही अपने माँ-बाप की सुनता। ...View More

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👉 निर्माण से पूर्व सुधार की सोचें (अन्तिम भाग)

भिक्षा व्यवसाय, मृतक भोज, बाल-विवाह, कन्या विक्रय, पत्नी त्याग आदि अनेकानेक प्रचलन ऐसे हैं जो औचित्य की कसौटी पर किसी भी प्रकार खरे सिद्ध नहीं होते फिर भी हमारे गले में फाँसी के फंदे की तरह कसे हुए हैं। इन कुरीतियों को इसी प्रकार सहते रहा गया, उनका...View More

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👉 शक्ति - साधना

शक्ति में समूचा अस्तित्त्व सिमटा है। जड़-चेतन इसी के रूप हैं। कहीं इसकी सुप्त निष्क्रियता झलकती है, तो कहीं इसकी जाग्रत् सक्रियता के दर्शन होते हैं। जीवन के विविध रूप इसी से प्रकटे हैं। पशु-पक्षियों में, वृक्ष-वनस्पतियों में इसी की चेतनता लहराती है। इसकी ही ऊर्जा गति-प्रगति, विकास-विस्तार के...View More

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👉 आत्मचिंतन के क्षण 21 Nov 2019

★ प्रेम गंगा की भाँति वह पवित्र जल है, जिसे जहाँ छिडका जाय, वहीं पवित्रता पैदा करेगा। उसमें आदर्शेंकी अविच्छिन्नता जुड़ी रहती है। आदर्श रहित प्यार को ही मोह कहते हैं। दूरदर्शिता, विवेकशीलता, शालीनता, पवित्रता, सदाशयता जैसे गुणों का भरपूर समावेश प्रेम में होता है। उसमें इन्हीं गुणों...View More

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👉 निर्माण से पूर्व सुधार की सोचें (भाग ५)

कुरीतियों की दृष्टि से यों अपना समाज भी अछूता नहीं हैं, पर अपना देश तो इसके लिए संसार भर में बदनाम है। विवाह योग्य लड़के लड़कियों के उपयुक्त जोड़ों का विवाह कर दिया जाय और सार्वजनिक घोषणा के रूप में उनका पंजीकरण करा देना या घरेलू त्यौहार जैसा...View More

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👉 आत्मचिंतन के क्षण 20 Nov 2019

★ स्वस्थ जीवन का आधार है- अध्यात्म सिद्धान्तों का जीवन के हर क्षण, हर गतिविधि में व्यापक समावेश। दवाओं से स्वास्थ्य नहीं खरीदा जा सकता। मनो,विकार  व्यक्तिगत व समष्टिगत रोगों का मूल कारण है। राष्ट्र के समग्र स्वास्थ्य हेतु, इसके निवारण के लिए अध्यात्म सिद्धान्तों को उत्कृष्ठता की...View More

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👉 क्या तुम मनुष्य हो?

क्या तुम मुनष्य हो? इस अटपटे सवाल के बारे में यही कहना है कि प्रेम तुममें जितना गहरा है, तुम उतने ही श्रेष्ठ मनुष्य हो। इसके विपरीत तुममें साधन-सम्पत्ति का लोभ जितना ज्यादा है, मनुष्य के रूप में तुम उतने ही निम्न हो। प्रेम और परिग्रह जिन्दगी की...View More