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    संयम के बिना जीवन का विकास नहीं होता। जीवन के सितार पर हृदयमोहक मधुर संगीत उसी समय गूँजता है, जब उसके तार नियम तथा संयम से बँधे होते है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस तरह जलादि शोधक द्रव्यों से मैला वस्त्र भी शुद्ध हो जाता है, उसी तरह आध्यात्मिक तप- साधन द्वारा आत्मा ज्ञानावरणादि अष्टविध कर्मफल से मुक्त हो जाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मन का नियन्त्रण मनुष्य का एक आवश्यक कर्तव्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस भी साधना में दुष्प्रवृत्ति तपाई, जलाई जा रही हो ऐसा कोई कृत्य तप है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बाहर के कौतूहलों को देखने भर से किसी की प्यास नहीं बुझती। देखने योग्य भीतर है। उसी को खोजो और भावनापूर्वक देखो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    तप से उच्चस्तरीय और अपराजेय समर्थता प्राप्त होती है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपना मूल्य समझो और विश्वास करो कि तुम संसार के महत्त्वपूर्ण व्यक्ति हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    साधना की सीढ़ियाँ -  उपासना, आत्मशोधन, परमार्थ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य का पहला पुरुषार्थ है- जीवन लक्ष्य में प्रमाद न होने देना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मज्ञान, आत्मसम्मान और आत्मसंयम ही मनुष्य को महती शक्ति की ओर ले जाते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उन्नति सम्पत्ति से नहीं, सद्गुण और सद्बुद्धि से होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गुण, कर्म और स्वभाव का परिष्कार ही अपनी सच्ची सेवा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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