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  • बाल निर्माण से संबंधित विचार


    सार्थकता उसी शिक्षा की है जो छात्र को विनम्र, सुव्यवस्थित और आदर्शवादी बना सके।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विद्याध्ययन एक तप है, जिसकी तेज से विद्यार्थी तपकर कुन्दन बनता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ब्रह्मचर्य ही जीवन है, तेज है, शक्ति है और सामर्थ्य है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान की गहराई तथा व्यवहार की मधुरता और श्रेष्ठता ही विद्यार्थी जीवन की सफलता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विद्यार्थी वह जिसमें ज्ञान की पिपासा हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    देश और भविष्य की सम्भावना देखनी है तो आज के बच्चों का स्तर देखो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बच्चे का भावी भाग्य बनाना सदा माता का कार्य होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन एक पाठशाला है, जिसमें अनुभवों के आधार पर हम शिक्षा प्राप्त करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वह सच्चा साहसी है, जो कभी निराश नहीं होता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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