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  • धर्म और विज्ञान से संबंधित विचार


    धर्म का उद्देश्य मानव को पथ भ्रष्ट होने से बचाना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म अर्थात् कर्तव्य, फर्ज, ड्यूटी, जिम्मेदारी और ईमानदारी का समुच्चय।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म से आशय है- अभ्युदय और निःश्रेयस् अर्थात उन गति- विधियों को अपनाया जाना, जो कल्याण एवं प्रगति का शालीनतायुक्त पथ प्रशस्त कर सकने की क्षमता रखती हों।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    इस विश्व ब्रह्माण्ड में दो शक्ति- सत्ताएँ आच्छादित हैं ।। एक जड़ दूसरी चेतना ।। इन्हीं को प्रकृति और पुरुष भी कहते हैं, स्थूल और सूक्ष्म भी ।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म का प्रथम आधार आस्तिकता -  ईश्वर विश्वास है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दर्शन को बनाने वाली माँ का नाम है- ‘मनीषा’


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपना सुख- वैभव दूसरों को बाँटना और दूसरों के प्रति ममता की वृद्धि ही धार्मिकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सिर काटने वाला वीर नहीं। वीरता आदर्श के निमित्त अड़ जाने में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म- मनुष्योचित कर्तव्यों को पहचानने तथा करने से सधता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म शब्द का अर्थ है- धारणा। यहाँ धारणा से तात्पर्य उन आदर्शों की अंतरंग से प्रतिष्ठापना से है, जो व्यक्ति और समाज की श्रेष्ठता और सद्भावना की दिशा में प्रेरित करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सन्ध्योपासना मनुष्य का परम आवश्यक धर्म कर्तव्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म आत्मा की पुकार है, ईश्वर का निर्णय है और विश्व कल्याण का वास्तविक कारण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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