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    परोपकार से बढ़कर और निरापद दूसरा कोई धर्म नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सन्ध्योपासना मनुष्य का परम आवश्यक धर्म कर्तव्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हिन्दू धर्म विश्व धर्म बनेगा और वेद मंत्रों से ब्रह्माण्ड गूँजेगा। भारत विश्व का मार्गदर्शक बनेगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सिर काटने वाला वीर नहीं। वीरता आदर्श के निमित्त अड़ जाने में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म का प्रथम आधार आस्तिकता -  ईश्वर विश्वास है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार में सच्चा सुख ईश्वर और धर्म पर विश्वास रखते हुए पूर्ण परिश्रम के साथ अपना कर्तव्य पालन करने में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दर्शन को बनाने वाली माँ का नाम है- ‘मनीषा’


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्माचरण करने वाला ही वास्तविक धर्म- प्रचारक होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों को पीड़ा न देना ही मानव धर्म है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अध्यात्म एक नकद धर्म है, जिसे मात्र आत्मशोधन की तपश्चर्या से ही भुनाया जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    इस विश्व ब्रह्माण्ड में दो शक्ति- सत्ताएँ आच्छादित हैं ।। एक जड़ दूसरी चेतना ।। इन्हीं को प्रकृति और पुरुष भी कहते हैं, स्थूल और सूक्ष्म भी ।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सब प्राणियों में भगवान् हैं

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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