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  • स्वस्थ जीवन से संबंधित विचार


    संसार में रहने का सच्चा तत्त्वज्ञान यही है कि रोजाना एक बार खिलखिलाकर जरूर हँस लें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हँसी- खुशी है जहाँ, तन्दुरुस्ती है वहाँ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    व्यायाम वह सुखद श्रम है, जिससे संगठन, एकता, अनुशासन एवं ब्रह्मवर्चस की भावनाएँ जाग्रत होती हैं ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वच्छता सभ्यता का प्रथम सोपान है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    श्रेष्ठता और संस्कृति का पहला गुण स्वच्छता है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वच्छता सभ्यता का प्रथम सोपान है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर उपासना की सर्वोपरि सब - रोगनाशक औषधि का आप नित्य सेवन करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परिश्रम ही स्वस्थ जीवन का मूलमंत्र है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    प्रकृति के अनुकूल चलें, स्वस्थ रहें।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वच्छ रहना देवत्व के समीप रहना है ।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीभ पर काबू रखो, स्वाद के लिए नहीं, स्वास्थ्य के लिए खाओ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दिनचर्या को व्यवस्थित बना देना आरोग्य की गारंटी है। 


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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