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    उत्तम पुस्तकें जाग्रत् देवता हैं। उनके अध्ययन- मनन के द्वारा पूजा करने पर तत्काल ही वरदान पाया जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने कुविचारों एवं दुःस्वभावों का शोधन ही प्रत्याहार है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    निर्धनता मनुष्य के लिए बेइज्जती का कारण नहीं हो सकती। यदि उसके पास वह सम्पत्ति मौजूद हो, जिसे 'सदाचार्' कहते है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    केवल ज्ञान ही एक ऐसा अक्षय तत्त्व है, जो कहीं भी, किसी अवस्था और किसी काल में भी मनुष्य का साथ नहीं छोड़ता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो दूसरों के अवगुणों पर जीत पा लेता है, वह ‘वीर’ कहलाता है पर इससे भी अगली श्रेणी का ‘महावीर’ वह है जिसने अपने आप को जीत लिया।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हर मनुष्य अपने स्तर की दुनिया अपने हाथों आप रचता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरे की त्रुटियों और बुराइयों को ही न ढूँढ़ते रहो, अपनी ओर भी देखो, जो अपनी बुराइयों सुधारने के लिये प्रयत्नशील है, उसे ही दूसरों की बुराई ढूँढ़ने का अधिकार है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सीखने की इच्छा रखने वालों के लिए पग- पग पर शिक्षक हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान अक्षय है, उसकी प्राप्ति मृत्यु शय्या तक बन पड़े तो भी उस अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने अज्ञान को दूर करके मन- मंदिर में ज्ञान का दीपक जलाना भगवान् की सच्ची पूजा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आशावाद और ईश्वरवाद एक ही रहस्य के दो नाम हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वह स्थान मंदिर है, जहाँ पुस्तकों के रूप में मूक;   किन्तु ज्ञान की चेतनायुक्त देवता निवास करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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