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  • स्वाध्याय और सदविचार से संबंधित विचार


    ‘स्वाध्यायन्मा प्रमदः’ अर्थात् स्वाध्याय में प्रमाद न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वाध्याय को जीवन में निश्चित स्थान दें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आशावाद और ईश्वरवाद एक ही रहस्य के दो नाम हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो ज्ञान समय पर काम न आए वह व्यर्थ है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईर्ष्या न करें, प्रेरणा ग्रहण करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    केवल ज्ञान ही एक ऐसा अक्षय तत्त्व है, जो कहीं भी, किसी अवस्था और किसी काल में भी मनुष्य का साथ नहीं छोड़ता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सज्जनों की कोई भी साधना कठिनाइयों में से होकर निकलने पर ही पूर्ण होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    महापुरुषों में ही महापुरुष उत्पन्न करने की क्षमता होती है। हाथियों के समूह में ही हाथी बढ़ते और पलते हैं। मूषक तो कुतरने वाली बिरादरी में ही बढ़ते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान और आचरण में जो सामंजस्य पैदा कर सके, उसे ही विद्या कहते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान तीन प्रकार से मिल सकते हैं- मनन से, अनुसरण से और अनुभव से


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार का सबसे बड़ा दिवालिया वह है, जिसने उत्साह खो दिया।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपासना परमात्मा की, साधना अन्तरात्मा की और आराधना विश्वात्मा की करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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