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  • प्रेरक विचार से संबंधित विचार


    अपने दोषों की ओर से अनभिज्ञ रहने से बढ़कर प्रमाद इस संसार में और कोई दूसरा नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जैसे आप हैं, वैसे ही आपका संसार है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुष्प की तरह खिलें, चंदन की तरह सुगंधित बनें तो, भगवान् भी सिर पर रखेंगे। 


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईमानदार होने का अर्थ है हजार मनकों में से अलग चमकने वाला हीरा ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ऊँचे उठो, प्रसुप्त को जगाओ, जो महान् है उसका अवलम्बन करो और आगे बढ़ो

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्म- निर्माण का ही दूसरा नाम भाग्य निर्माण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सिर काटने वाला वीर नहीं। वीरता आदर्श के निमित्त अड़ जाने में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो दीपक की तरह प्रकाश उत्पन्न करने को तैयार है, प्रभु की ज्योति का अवतरण उसी में होगा।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपासना अर्थात् आदर्शों के समुच्चय परब्रह्म के साथ समीपता स्थापित करना, उनकी प्रेरणाएँ स्थापित करना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    असफलता केवल यह सिद्ध करती है कि सफलता का प्रयास पूरे मन से नहीं हुआ ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वही काम करना ठीक है, जिसे करके पछताना न पड़े।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सत्य अकेला नहीं प्रेम और न्याय को भी साथ लेकर चलता है। इसी प्रकार असत्य के साथ पतन और विग्रह के सहचरों की जोड़ी चलती है.

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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