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    गुण, कर्म एवं स्वभाव के परिष्कार की प्रयोगशाला है- परिवार।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ‘‘हिन्दू धर्म विश्व धर्म बनेगा और वेद मंत्रों से ब्रह्माण्ड गूँजेगा। भारत विश्व का मार्गदर्शक बनेगा।’’


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आज के युग की सबसे बड़ी शक्ति शस्त्र नहीं, सद्विचार है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धरती पर स्वर्ग अवतरित करने का प्रारम्भ सफाई और स्वच्छता से करें।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विपरीत परिस्थितियों में भी जो ईमान, साहस और धैर्य को कायम रख सके,वस्तुतः वही सच्चा शूरवीर है |


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आभूषणों के अलंकार से कहीं श्रेष्ठ है गुणों का अलंकार।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी की प्रतिमा को निखारना एक पुण्यजनक अनुष्ठान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जमाना तब बदलेगा, जब हम स्वयं बदलेंगे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संतोष, संयम, सच्चाई, सज्जनता और भक्ति की संतुलित मनोभूमि बनाये रखना ही स्वर्ग है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर कैसा है और कहाँ है ? इस झंझट मे भले ही न पड़ो पर यह तो देखो कि तुम्हें किस लिये बनाया और किस तरह जीने के लिये कहा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    निरक्षर महिलाएँ साक्षर बनने का प्रयत्न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परिवार को स्वर्ग बनाने की प्रकृति प्रदत्त क्षमता नारी में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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