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  • समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शिक्षा आत्मा का भोजन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सत्साहित्य सत्पुरुषों का मूर्तिमान हृदय एवं मस्तिष्क है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    खाली बैठे मनुष्य का दिमाग शैतान का कारखाना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दिनचर्या को व्यवस्थित बना देना आरोग्य की गारंटी है। 


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विद्यार्थी वह, जिसमें ज्ञान की पिपासा हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा अहंकारी से जितना अप्रसन्न होता है उतना और किसी से नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शुद्ध और निश्छल हृदय से तन्मयता की अवस्था में ही ईश्वरीय वाणी सुनी जा सकती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् जाति- पाँति को नहीं, कर्म को देखते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    फूलों की तरह हँसते- मुस्कराते जीवन व्यतीत करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिनकी तुम प्रशंसा करते हो, उनके गुणों को अपनाओ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दुष्टों का वैभव बढ़ते देखकर ललचाओं मत। वे गुब्बारे की तरह फूलते और बबूले की तरह फूटते रहते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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