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  • समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा को सुख से नहीं, पुण्य से शान्ति मिलती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपना मूल्य समझो और विश्वास करो कि तुम संसार के महत्त्वपूर्ण व्यक्ति हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा का स्वार्थ ही हमारा सच्चा स्वार्थ है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्म निर्माण ही युग निर्माण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपनी वाक्शक्ति का दुरुपयोग न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अध्यात्मवाद, जीवन का वह तत्त्वज्ञान है, जिसके ऊपर हमारी भीतरी और बाहरी उन्नति, समृद्धि एवं सुख- शान्ति निर्भर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हँसती- हँसाती जिन्दगी ही सार्थक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    समय का सदुपयोग ही उन्नति का मूलमंत्र है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    यदि भवसागर से पार होने की इच्छा है, तो सर्वप्रथम ज्ञान संचय का प्रयत्न करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों के साथ वैसी ही उदारता बरतो, जैसे ईश्वर ने तुम्हारे साथ बरती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    योग का अर्थ है- आदर्शवादिता के प्रति आत्म- समर्पण।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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