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  • समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    काल (समय) सबसे बड़ा देवता है। उसका निरादर मत करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आस्तिकता का अर्थ है- ईश्वर को मानना। मानने का अर्थ है- उसका अनुयायी होना और अनुयायी होने का तात्पर्य है- उसके विचार, निर्देशों एवं आदर्श के अनुसार चलना।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जब तक हम ईश्वर की बताई राह पर चलते हैं वह हमारी सहायता करता है। जब कुमार्ग पर चलते हैं तो मुसीबतों में फँसा कर झिड़क देता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्विचार ही स्वर्ग और कुविचार ही नरक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शिक्षक राष्ट्र मंदिर के कुशल शिल्पी हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धिक्कार है उस राष्ट्र को, जिसका हर सूबा अपने को एक राष्ट्र समझता है। धिक्कार है उस सूबे को जिसका हर कबीला अपने को एक सूबा समझता है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी परिवार का हृदय है। परिवार का संपूर्ण अस्तित्व तथा वातावरण नारी पर- सुगृहिणी पर निर्भर करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरे तुम्हें क्या कहते हैं, इस पर ध्यान मत दो। तुम अपनी दृष्टि में अच्छे बनो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    किसी को गलत मार्ग पर ले जाने वाली सलाह मत दो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    समय का सदुपयोग ही उन्नति का मूलमंत्र है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विश्व कल्याण का मार्ग है - नारी उत्थान।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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