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  • समय रूपी अमूल्य उपहार का एक क्षण भी आलस्य और प्रमाद में नष्ट न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    महापुरुषों का ग्रन्थ पढ़ना सबसे बड़ा सत्संग है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान की आराधना इस विश्व का सबसे श्रेष्ठ सत्कर्म है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर को अपने हृदय में अनुभव करना, उसकी सत्ता को संपूर्ण सचराचर जगत् में ओतप्रोत देखना और उसकी अनुभूति से रोमांचित हो उठना ही सच्ची आस्तिकता है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् भावना की उत्कृष्टता को ही प्यार करता है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परोपकार से बढ़कर और निरापद दूसरा कोई धर्म नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सतोगुणी भोजन से ही मन की सात्विकता स्थिर रहती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों के अनुभव से लाभ उठाने वाला बुद्धिमान् है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्ज्ञान से भरी हुई पुस्तकें देवताओं के समान है, जो दिव्य विचारों से हमें लाभान्वित करती हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गायत्री को इष्ट मानने का अर्थ है- सत्प्रवृत्ति की सर्वोत्कृष्टता पर आस्था।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सन्मार्ग का राजपथ कभी भी न छोड़ें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हम बदलेंगे तो हमारी दुनिया भी बदलेगी।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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