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    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान तीन प्रकार से मिल सकते हैं- मनन से, अनुसरण से और अनुभव से


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है, परन्तु इनके परिणामों में चुनावों की कोई सुविधा नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य एक भटका हुआ देवता है। सही दिशा पर चल सके, तो उससे बढ़कर श्रेष्ठ और कोई नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ‘स्वर्ग’ शब्द में जिन गुणों का बोध होता है, सफाई और शुचिता उनमें सर्वप्रमुख है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आज का काम कल पर मत टालो



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वर्ग और नरक मनुष्य के ज्ञान और अज्ञान का ही परिणाम है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुरुषार्थी लोग अपने भाग्य का निर्माण आप करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अवसर की प्रतीक्षा में मत बैठो। आज का अवसर ही सर्वोत्तम है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परिवार एक प्रयोगशाला, पाठशाला, व्यायामशाला अथवा एक ऐसी टकसाल है, जहाँ समर्थ राष्ट्र के लिए अभीष्ट महामानवों की ढलाई होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सार्थक उपदेश वाणी से नहीं, अनुकरणीय आचरण से दिये जाते हैं।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस तरह जलादि शोधक द्रव्यों से मैला वस्त्र भी शुद्ध हो जाता है, उसी तरह आध्यात्मिक तप- साधन द्वारा आत्मा ज्ञानावरणादि अष्टविध कर्मफल से मुक्त हो जाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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