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  • फालतू समय को फिजूल कार्यों से बचाकर ज्ञान प्राप्ति में लगाएँ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस समाज, देश अथवा परिवार में नारी को उचित अधिकार देकर उन्नति तथा विकास का अवसर देकर सहयोगिनी बना लिया जाता है उस राष्ट्र, समाज तथा परिवार में सुख- शान्ति तथा वैभव, समृद्धि के रूप में स्वर्ग की ही स्थापना हो जाया करती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर उपासना की सर्वोपरि सब रोगनाशक औषधि का आप नित्य सेवन करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आज संपूर्ण नारी जाति से प्रार्थना है कि वह घिनौने वातावरण को छोड़कर परवशता की ग्रंथियाँ काटकर आगे बढ़े और समाज सुधार का, नैतिक उत्थान का, धार्मिक पुनर्जागरण का संदेश मानवता को दे। पुरुषों से कंधा मिलाकर घर और बाहर दोनों क्षेत्रों में नारी को कार्य करना होगा। आज भारत की माँग है- अध्यात्म एवं वैदिक धर्म का पुनरुत्थान और भारतीय धर्म एवं संस्कृति का पुनर्स्थापन। जब घर- घर में पुनः वेदों की वाणी गूँज उठेगी, तब भारत फिर से अपने प्राचीन जगद्गुरु के गौरव को प्राप्त करेगा। हर क्षेत्र में सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनैतिक, नैतिक, शैक्षणिक एवं नैष्ठिक पुनर्गठन करते हुए आज की शिक्षित नारी जिस पथ का निर्माण करेगी, वह पथ बड़ा सुगम एवं आध्यात्मिक होगा। नारी की सबल प्रेरणा पुरुष को नव शक्ति से भर देगी;   किन्तु इसके लिए आवश्यक है कि उसे आत्मबल, चरित्रबल, तपबल में महान् बनना होगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार में सबसे सच्चा एवं निःस्वार्थ प्रेम माता का होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हर मनुष्य का भाग्य उसकी मुट्ठी में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर के प्रति समर्पण, विसर्जन, विलय का तात्पर्य है- उत्कृष्टता के साथ अपने आपको सघन रूप से जोड़ लेना |


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वयं उत्कृष्ट बनिए और दूसरों को श्रेष्ठ बनाइए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सफलता का आधार है- सुव्यवस्थित योजना, प्रखर बुद्धि और सघन प्रयास।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मानव जीवन की सार्थकता के लिए आचार पवित्रता अनिवार्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान प्राप्ति के लिए निरन्तर प्रयत्नशील रहें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चिन्तन बहुतों ने सिखाया है, पर ऐसे बहुत कम मिले, जो चिन्तन को जीवन में उतारना सिखा पाते।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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