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  • देवत्व की रक्षा करने से बढ़कर और कोई धर्म नहीं और देवत्व अपनाने से बढ़कर और कोई कर्तव्य नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वही उन्नति कर सकता है, जो स्वयं को उपदेश देता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आज के बच्चे कल के राष्ट्र निर्माता हैं।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बड़प्पन सुविधा संवर्धन में नहीं, सद्गुण संवर्धन का नाम है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमेश्वर का प्यार केवल सदाचारी और कर्तव्य परायणों के लिए सुरक्षित है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उत्तम ज्ञान और सद्विचार कभी भी नष्ट नहीं होता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने व्यक्तित्व को श्रेष्ठ विचारों से स्नान करा देना ही ध्यान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् के काम में लग जाने वाले कभी घाटे में नहीं रह सकते।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दर्शन को बनाने वाली माँ का नाम है- ‘मनीषा’


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    तीन प्रत्यक्ष देवताओं में माता, पिता और गुरू का स्थान है। इन तीनों में माता प्रथम है। यह इसलिए कि मनुष्य को अपने प्रथम उपकारकर्ता के प्रति कृतज्ञतापूर्वक नमन करने का स्मरण सदा ही बना रहे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    किसी को आत्म- विश्वास जगाने वाला प्रोत्साहन देना ही सर्वोत्तम उपहार है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कर्तव्यों के विषय में आने वाले कल की कल्पना एक अंध- विश्वास है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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