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    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    फल की आतुरता प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आशा की ज्योति कभी बुझने न दें।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आपत्ति के समय ही मनुष्य के गुणों की परख होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सादगी सबसे बड़ा फैशन है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिनकी तुम प्रशंसा करते हो, उनके गुणों को अपनाओ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शान्तिकुञ्ज एक विश्वविद्यालय है। कायाकल्प के लिए बनी एक अकादमी है। हमारी सतयुगी सपनों का महल है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    श्रम और तितिक्षा से शरीर मजबूत बनता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आस्तिकता के दो अपरिहार्य अंग हैं- आशा और प्रसन्नता। ईश्वर की सत्ता पर विश्वास रखने वाला सदा आशा का दीपक जलाए रखता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बड़प्पन सादगी और शालीनता में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस तरह एक ही धागे में माला के अनेक दाने पिरोये हुए हैं, उसी तरह प्राणरूप ईश्वर में सभी प्राणी पिरोये हुए हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    देने का आनन्द पाने के आनन्द से बड़ा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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