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  • परिवार एक प्रयोगशाला, पाठशाला, व्यायामशाला अथवा एक ऐसी टकसाल है, जहाँ समर्थ राष्ट्र के लिए अभीष्ट महामानवों की ढलाई होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सफलता का आधार है- सुव्यवस्थित योजना, प्रखर बुद्धि और सघन प्रयास।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर उन्हीं की सहायता करता है, जो अपनी सहायता आप करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जागो शक्ति स्वरूपा नारी, तुम हो दिव्य क्रान्ति चिनगारी।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पढ़ना ज्ञान के नेत्र खोलने के लिए होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ऊँचे उठो, प्रसुप्त को जगाओ, जो महान् है उसका अवलम्बन करो और आगे बढ़ो


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिसने अन्तःकरण की शरण ले ली, उसे कोई भी भय नहीं प्रभावित कर पाता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कर्मयोग का अर्थ है - लोकमंगल के उच्च स्तरीय प्रयोजनों में पुरुषार्थ को नियोजित किए रहना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मन ही अपना मित्र और मन ही अपना शत्रु है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर भक्ति का अर्थ है - आदर्शों के प्रति असीम प्यार। असीम का तात्पर्य है- इतना प्रबल कि उसे क्रियान्वित किये बिना रहा ही न जा सके।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों के साथ वह व्यवहार न करो, जो तुम्हें अपने लिए पसन्द नहीं।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ‘स्वाध्यायन्मा प्रमदः’ अर्थात् स्वाध्याय में प्रमाद न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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