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  • अपने दोषों की ओर से अनजान रहने से बढ़कर प्रमाद और कोई नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आदर्श परिवार ही एक सशक्त समाज की आधारशिला है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ऐसे ईश्वर को खोज निकालें । जो चरित्र बन कर साथ- साथ रह सके ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नित्य प्रतिदिन छाते रहने वाले कुसंस्कार- कषाय की महाव्याधि से छुटकारा पाने हेतु उपासना एक अमोघ औषधि है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा का स्वार्थ ही हमारा सच्चा स्वार्थ है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो विचार जितनी मात्रा में जीवन में उतर चुका है उतना ही वह अर्थपूर्ण होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने कुविचारों, कुसंस्कारों एवं दुःस्वप्नों का शोधन ही प्रत्याहार है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों के साथ वह व्यवहार मत करो, जो तुम्हें अपने लिए पसन्द नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वास्थ्य संयम पर निर्भर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस भी साधना में दुष्प्रवृत्ति तपाई, जलाई जा रही हो ऐसा कोई कृत्य तप है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् जिसे प्यार करते हैं, उसे परमार्थ प्रयोजनों की पूर्ति के लिए स्फुरणा एवं साहसिकता प्रदान करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर एक प्रकाश है, जो हमें न्यायनिष्ठ, विवेकशील और कर्तव्यनिष्ठ बनने के लिए मार्गदर्शन करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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