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  • मनुष्य जन्म सरल है, पर मनुष्यता कठिन प्रयत्न करके कमानी पड़ती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सज्जनों की कोई भी साधना कठिनाइयों में से होकर निकलने पर ही पूर्ण होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वाधीन मन मनुष्य का सच्चा सहायक होता है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने को समझे। मल- मूत्र की गठरी को अपना आधार न माने। ईश्वर का अंश पंचतत्त्वों की गठरी में इस लिये बंधा है कि इस उपकरण के सहारे वह अपने अभीष्ट प्रयोजनों को पूरा कर सके। लुहार हथौड़ा नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शान्तिकुञ्ज एक विश्वविद्यालय है। कायाकल्प के लिए बनी एक अकादमी है। हमारी सतयुगी सपनों का महल है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    झगड़ने वाले दुश्मनों से उतना डरने की आवश्यकता नहीं, जितना मित्र बन कर घात करने वालों से।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उत्कृष्ट जीवन का स्वरूप हे- दूसरों के प्रति नम्र और अपने प्रति कठोर होना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सन्तोष और सादगी का पालन करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा की ओर जाने वाला ज्ञानदान करना सर्वश्रेष्ठ भगवद्भक्ति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बिगड़ी क्यों भारत की साख, भीख माँगते अस्सी लाख।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् के काम में लग जाने वाले कभी घाटे में नहीं रह सकते।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा की सृष्टि का हर व्यक्ति समान है। चाहे उसका रंग, वर्ण, कुल और गोत्र कुछ भी क्यों न हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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