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  • भगवान् का अनुग्रह जहाँ साथ है, वहाँ असंभव जैसी कोई चीज शेष नहीं रह जाती।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान तीन प्रकार से मिल सकते हैं- मनन से, अनुसरण से और अनुभव से


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    महादेवी वर्मा-  "नारी केवल माँस- पिण्ड की संज्ञा नहीं है। आदिमकाल से आज तक विकास पथ पर पुरुष का साथ देकर उसकी यात्रा को सफल बनाकर अपने अभिशापों को स्वयं झेलकर और अपने वरदानों से जीवन में अक्षय शक्ति भरकर मानवी ने जिस व्यक्तित्व, चेतना और हृदय का विकास मिला है, उसी का पर्याय नारी है।‘‘


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपना सुधार संसार की सबसे बड़ी सेवा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वही काम करना ठीक है, जिसे करके पछताना न पड़े।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सारा विश्व भगवान् का रूप है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परिश्रम ही स्वस्थ जीवन का मूलमंत्र है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पढ़ने का लाभ तभी है जब उसे व्यवहार में लाया जाय।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दुनिया की निन्दा स्तुति की परवाह मत करो। हृदय टटोलो और उसकी आवाज सुनो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आज का नया दिवस हमारे लिए एक अनमोल अवसर है।!


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा की उत्कृष्टता संसार की सबसे बड़ी सिद्धि है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जैसा खायें अन्न, वैसा बने मन।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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