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  • खुद साफ रहो, सुरक्षित रहो और औरों को भी रोगों से बचाओ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अश्लील पोस्टर और गन्दे चित्र स्वयं के अस्तित्व, परिवार और समाज पर लगा कालिख है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बुरे प्रभावों से बचना, उनका प्रतिकार करना, इसी का नाम संयम है, जो मनुष्य में योग्यता पैदा कर उसे प्रभावशाली बनाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    रोग वे दण्ड है जो स्वास्थ्य के सम्बन्ध में भूल करने या संयम से दूर रहने के कारण भोगने पड़ते है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य जैसा सोचता है ठीक वैसा ही बनता जाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उत्कृष्ट जीवन का स्वरूप है- दूसरों के प्रति नम्र और अपने प्रति कठोर होना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    यह संसार एक विद्यालय है, जिसमें प्रवेश लेकर हर प्राणी अपनी प्रतिभा का परिपूर्ण विकास कर सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    युग निर्माण योजना कागजी या कल्पनात्मक जल्पना नहीं है। यह समय की पुकार, जनमानस की गुहार और दैवी इच्छा की प्रत्यक्ष प्रक्रिया है। इसे साकार होना ही है। इसको आरंभ करने का श्रेय अखण्ड ज्योति परिवार को मिल रहा है, इस सौभाग्य के लिए हममें से प्रत्येक को प्रसन्न होना चाहिए और गर्व अनुभव करना चाहिए। योजना के क्रियान्वयन के लिए बिना समय नष्ट किये हमें अपने कर्तव्य और उत्तरदायित्व की पूर्ति के लिए कटिबद्ध हो जाना चाहिए। आलस्य और उपेक्षा करने वालों को पश्चाताप ही हाथ रह जाएगी।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों की बुराई, दोष दर्शन अपने ही विकृत आन्तरिक जीवन का दर्शन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सच्चे उपदेशक वाणी से नहीं, जीवन से सिखाते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शुभ सोचें और शुभ ही करें।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चिन्तन बहुतों ने सिखाया है, पर ऐसे बहुत कम मिले, जो चिन्तन को जीवन में उतारना सिखा पाते।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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