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  • वीर वह है जिसने दूसरों को परास्त कर दिया। बहादुरों में भी बहादुर वह है, जिसने अपने को जीत लिया।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परिवार निर्माण एक विशिष्ट स्तर की साधना है। इसमें योगी जैसी प्रज्ञा और तपस्वी जैसी प्रखर प्रतिभा का परिचय देना पड़ता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने आचरण से ही दूसरों को प्रभावशाली शिक्षा दी जा सकती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वही व्यक्ति है चतुर सुजान, जिसकी हो सीमित संतान।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य परिस्थितियों का गुलाम नहीं, अपने भाग्य का निर्माता और विधाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हर परिस्थिति में प्रसन्न रहिए, निर्भय रहिए और कर्तव्य करते रहिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार का सबसे बड़ा बल आत्मबल गायत्री साधक को प्राप्त होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म से आशय है- अभ्युदय और निःश्रेयस् अर्थात उन गति- विधियों को अपनाया जाना, जो कल्याण एवं प्रगति का शालीनतायुक्त पथ प्रशस्त कर सकने की क्षमता रखती हों।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन की कोई भी साधना कठिनाइयों में होकर निकलने पर ही पूर्ण होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुस्तकालय हमारा गुरु है, जो अज्ञान के अन्धकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश देता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने दृष्टिकोण को उत्कृष्टता के साथ जोड़ देना योग है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सम्पत्ति बहुतों के पास होती है, पर उसका सदुपयोग बहुत कम लोग जानते हैं। 


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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