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  • जो हम चाहते हैं, प्रयत्न द्वारा वह अवश्य ही प्राप्त हो जाय यह आवश्यक नहीं; क्योंकि फल देना परमात्मा के हाथ में हैं।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    तप का अर्थ- शरीर को यातनाएँ देना नहीं, वरन् श्रेष्ठ जीवनक्रम अपनाना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उत्तम पुस्तकें जाग्रत् देवता हैं। उनके अध्ययन- मनन के द्वारा पूजा करने पर तत्काल ही वरदान पाया जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वाध्यायन्मा प्रमदः!  अर्थात् स्वाध्याय में प्रमाद न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी की प्रतिमा को निखारना एक पुण्यजनक अनुष्ठान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आज का नया दिवस हमारे लिए एक अनमोल अवसर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी सुगृहिणी, गृहलक्ष्मी है। उसमें परिवार को स्वर्ग बनाने की प्रकृति प्रदत्त क्षमता विद्यमान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वह सच्चा साहसी है, जो कभी निराश नहीं होता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन और जगत् की प्रत्येक घटना को प्रभु की लीला- अनुकंपा मानकर चलना चाहिए। सुख- दुःख में, मान- अपमान में, लाभ- हानि में संतुलित व्यक्ति ही सुखी रहता है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुस्तकालय सच्चा देवालय है, जहाँ ज्ञान मंदिर के रूप में विचारों की पूजा होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हिन्दू धर्म विश्व धर्म बनेगा और वेद मंत्रों से ब्रह्माण्ड गूँजेगा। भारत विश्व का मार्गदर्शक बनेगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शान्तिकुंज एक विश्वविद्यालय है। कायाकल्प के लिए बनी एक अकादमी है। हमारी सतयुगी सपनों का महल है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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