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  • जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है- ईश्वर प्राप्ति।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी की गरिमा कलंकित न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    समय की कद्र करो। एक मिनट भी फिजूल मत गँवाओ


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपासना सच्ची तभी है, जब जीवन में ईश्वर घुल जाए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    युग परिवर्तन का पहला कार्य है- अपना परिवर्तन।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आज के काम को कल पर मत टालिए



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी जन्मदात्री है। समाज का प्रत्येक भावी सदस्य उसकी गोद में पलकर संसार में खड़ा होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    डाँ. ऐनीबेसेण्ट- "किसी भी राष्ट्र का निर्माण अकेले पुरुष पर नहीं हो सकता। राष्ट्र की स्त्रियाँ पत्नी- रूप में अपने पतियों को साहस प्रदान करती है तथा मातृ रूप से भावी संतति को इस प्रकार शिक्षित करती हैं, जिससे कि वह स्वतन्त्रता, आत्म सम्मान और आचरण की उच्चता के लिए किए गये हमारे प्रयत्नों का अनुगमन कर सके। कोई भी पक्षी एक पंख से नहीं उड़ सकता, इसी प्रकार कोई भी राष्ट्र स्त्री और पुरुष दोनों में से किसी एक वर्ग के द्वारा उन्नत नहीं हो सकता।‘‘


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अदम्य उत्साह और प्रबल पुरुषार्थ को कुण्ठित कर सके ऐसी कोई शक्ति इस संसार में नहीं है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विवेक और पुरुषार्थ जिसके साथी हैं, वही प्रकाश प्राप्त करेंगे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान की परिपक्वता कर्म से होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धैर्य, अनुद्वेग, साहस, प्रसन्नता, दृढ़ता और समता की संतुलित स्थिति सदैव बनाये रखें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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