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  • राष्ट्र को बुराइयों से बचाये रखने का उत्तरदायित्व पुरोहितों का है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने को समझे। मल- मूत्र की गठरी को अपना आधार न माने। ईश्वर का अंश पंचतत्त्वों की गठरी में इस लिये बंधा है कि इस उपकरण के सहारे वह अपने अभीष्ट प्रयोजनों को पूरा कर सके। लुहार हथौड़ा नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आज के युग की सबसे बड़ी शक्ति शस्त्र नहीं, सद्विचार है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों के साथ वह व्यवहार न करो, जो तुम्हें अपने लिए पसन्द नहीं।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस भी समुदाय में स्वाभिमानी, सुसंस्कृत, श्रमशील नारी विद्यमान होती है, वह समाज निश्चित ही प्रगति करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो जन्म- जन्मान्तरों की संचित पशु- प्रवृत्तियों का नियमन कर सकता है, वह योगी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    साधना या आत्म- विकास के क्षेत्र में पुरुष- स्त्री का भेद नहीं है। साधक आत्मा है। उन्हें अपने को पुरुष- स्त्री न समझकर केवल आत्मा ही समझें। लिंग- भेद की दृष्टि से उन पर कोई भी अयोग्यता थोपी जानी व्यर्थ और उपहासजनक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पूर्ण मनुष्यत्व पाने के लिए अपने आपको वश में करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन में वर्तमान को महत्त्व दीजिए और उसका सच्चा सदुपयोग कीजिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईर्ष्या से नहीं, अध्यवसाय से हम ऊँचे उठ सकते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शान्तिकुंज एक क्रान्तिकारी विश्वविद्यालय है। अनौचित्य की नींव हिला देने वाली यह संस्था प्रभात पर्व की एक नवोदित किरण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों के उपकारों को स्मरण रखना सज्जनता का प्रथम चिह्न है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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