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  • अनेक प्रकार के योगों में एक गृहस्थ योग भी है। इसमें परमार्थ, सेवा, प्रेम, सहायता, त्याग, उदारता और बदला पाने की इच्छा से विमुखता- यही दृष्टिकोण प्रधान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर विश्वास का फलितार्थ है- आत्मविश्वास और सदाशयता के सत्परिणामों पर भरोसा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सभ्यता का स्वरूप है- सादगी, अपने लिए कठोरता और दूसरों के लिए उदारता ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिनके भीतर- बाहर एक ही बात है, वही निष्कपट व्यक्ति धन्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    योग्यता और परिस्थिति को ध्यान में रखकर महात्वाकांक्षाएँगढ़ने वाला दुखी रहता और उपहास सहता है ।।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म का महान् महत्त्व केवल दो शब्दों में निहित हैं, वे हैं- दया और प्रेम।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कर्तव्यशील मनुष्य ही धार्मिक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिसने अन्तःकरण की शरण ले ली, उसे कोई भी भय नहीं प्रभावित कर पाता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संयम विहीन जीवन शुष्क एवं पशु के समान निःसार है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो व्यक्ति सन्ध्या के डूबते हुए सूर्य को देखकर दुःखी होता है और प्रातः के सुनहरे अरुणोदय पर विश्वास नहीं करता, वह नास्तिक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्यवाद हमें नपुंसक और निर्जीव बनाता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नर और नारी एक ही आत्मा के दो रूप हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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