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  • नैतिक अनाचार, राजनैतिक भ्रष्टाचार एवं सामाजिक कुरीतियों के जंजाल से निकलें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    किसी बेईमान का कोई सच्चा मित्र नहीं होता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चरित्र हमारे अन्तर का दीपक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने अज्ञान को दूर करके मन- मन्दिर में ज्ञान का दीपक जलाना भगवान् की सच्ची पूजा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    व्यक्तित्व मान्यताओं, आदतों, इच्छाओं का समुच्चय मात्र है। वह इन्हीं तीनों के सहारे गढ़ा गया है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बड़प्पन सुविधा संवर्धन में नहीं, सद्गुण संवर्धन का नाम है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार में सच्चा सुख ईश्वर और धर्म पर विश्वास रखते हुए पूर्ण परिश्रम के साथ अपना कर्तव्य पालन करने में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस भी साधना में दुष्प्रवृत्ति तपाई, जलाई जा रही हो ऐसा कोई कृत्य तप है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    यदि भवसागर से पार होने की इच्छा है, तो सर्वप्रथम ज्ञान संचय का प्रयत्न करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वास्थ्य संयम पर निर्भर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी का गुण लज्जा, भय या संकोच नहीं;  बल्कि विनय, आत्म- श्रद्धा, निर्भयता, शुचिता और आत्म सौन्दर्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य को ऊँचा उठाने और नीचा गिराने में उसकी भावना ही एकमात्र कारण होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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