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  • आत्मानुशासन और आत्म - संतुलन का अभ्यास ही योग साधना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी का सृजन जिन तत्वों से हुआ है, उनमें करुणा, स्नेह, सौजन्य, आत्मीयता, आध्यात्मिकता का बाहुल्य है। एक ओर सेवा और समर्पण जैसे उसके अनूठे गुण हैं तो दूसरी ओर साहस और शौर्य जैसे आध्यात्मिक गुणों की भी कमी नहीं। शान्ति, सुकुमारता, सृजनात्मकता, भावनात्मक की विशेष विभूतियों से सम्पन्न नारी शक्ति का योगदान प्रत्येक क्षेत्र के लिए मंगलमय होगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो मन का गुलाम है, वह ईश्वर भक्त नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी   परिवार को श्रेष्ठता से अभिपूरित, धरती को स्वर्ग बनाती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चरित्र है तो सभी कुछ है, चरित्र नहीं तो कुछ भी नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वह मत करो, जिसके लिए पीछे पछताना पड़े |


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मानवता की यही पुकार, रोको नारी अत्याचार।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अध्यात्म का अर्थ है- अपने आपको सही करना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शील, लज्जा और शिष्टता ही नारी का भूषण है;  जो उनकी पोशाक, वाणी, दृष्टि एवं चेष्टा से सदैव प्रकट होते रहना अभीष्ट है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी घर के देवालय में अवस्थित एक प्रत्यक्ष देवी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् के काम में लग जाने वाले कभी घाटे में नहीं रह सकते।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईर्ष्या से नहीं, अध्यवसाय से हम ऊँचे उठ सकते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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