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  • मनुष्य जीवन कर्मप्रधान है। भाग्य भी कर्म का ही प्रति- फल है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    इस संसार में सन्तोष से बढ़कर कोई सुख नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    निरक्षरता मनुष्य जीवन का बहुत बड़ा कलंक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    इतराने में नहीं, श्रेष्ठ कार्यों में ऐश्वर्य का उपयोग करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो कुछ बच्चे को सिखलाते, उसे स्वयं कितना अपनाते।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वास्तविक शिक्षा वह है जो अपने को सुधारना और दूसरों को संभालना सिखाये।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    फल की आतुरता प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    इस संसार में कमजोर रहना सबसे बड़ा अपराध है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गन्दे फूहड़ चित्र हटाओ, माँ- बहिनों की लाज बचाओ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उत्कृष्ट जीवन का स्वरूप है- दूसरों के प्रति नम्र और अपने प्रति कठोर होना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार भवबंधन नहीं है और न ही माया जाल है। वह सृष्टा की सर्वोत्तम कलाकृति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वच्छ रहना देवत्व के समीप रहना है ।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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