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  • बुराई चाहे थोड़ी ही क्यों न हो चिन्ता की बात है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गृहस्थ एक प्रत्यक्ष स्वर्ग है, इसी धरती पर है। घर में सत्प्रवृत्तियों की फसल बोकर उससे सब कुछ पाया जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने अज्ञान को दूर करके मन- मंदिर में ज्ञान का दीपक जलाना भगवान् की सच्ची पूजा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मानवता एवं उत्कृष्टता का दूसरा नाम है- आस्तिकता। उपासना इसी का अभ्यास करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण विज्ञानसम्मत मानसिक व्यायाम है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी धरती है, नर उससे उत्पन्न होने वाले पौधे हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारियों  जागो, अपने को पहचानो


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    एक करोड़पति भी मानसिक दृष्टि से दीन- दरिद्र, गरीब, कंगाल हो सकता है और एक गरीब भी अपनी स्थिति में अमीरी का अनुभव कर सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    तीन प्रत्यक्ष देवताओं में माता, पिता और गुरू का स्थान है। इन तीनों में माता प्रथम है। यह इसलिए कि मनुष्य को अपने प्रथम उपकारकर्ता के प्रति कृतज्ञतापूर्वक नमन करने का स्मरण सदा ही बना रहे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परोपकार से बढ़कर और निरापद दूसरा कोई धर्म नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर को अपने हृदय में अनुभव करना, उसकी सत्ता को संपूर्ण सचराचर जगत् में ओतप्रोत देखना और उसकी अनुभूति से रोमांचित हो उठना ही सच्ची आस्तिकता है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा की उत्कृष्टता संसार की सबसे बड़ी सिद्धि है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन का हर क्षण उज्ज्वल भविष्य की संभावना लेकर आता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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