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  • पुरुष- स्त्री वस्तुतः समान हैं। एक ही रथ के दो पहिए हैं। उसमें से न कोई छोटा है, न बड़ा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    निर्मल हृदय में ही भगवान का बोध होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन दिन काटने के लिए नहीं; वरन् महान् कार्य करने के लिए है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वर्ग और नरक अपने घर में ही देखना चाहो तो मुसकान में स्वर्ग उतरना और विग्रह के साथ जुड़ा हुआ नरक कभी भी प्रत्यक्ष देख लें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पढ़ना तो बहुत जानते हैं, पर यह कोई विरला ही जानता है कि क्या और क्यों पढ़ना चाहिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वीरों का मन न वज्र से टूटता है और न प्रलोभन की कीचड़ में फिसलता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    युग परिवर्तन का पहला कार्य है- अपना परिवर्तन।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    माँ के आशीष से बड़ी कोई शक्ति नहीं है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् भावना की उत्कृष्टता को ही प्यार करता है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो ज्ञान समय पर काम न आए वह व्यर्थ है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान का उद्देश्य विचारवान बनना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वच्छ मन वाला व्यक्ति आनन्द की प्रतिमूर्ति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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