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  • ईश्वर विश्वास का फलितार्थ है- आत्मविश्वास और सदाशयता के सत्परिणामों पर भरोसा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य और कुछ नहीं, मात्र भटका हुआ देवता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपनी राह आप बनाएँ, ताकि सफलता के लक्ष्य तक पहुँचे, आसरा तकते रहने से तो निराशा ही हाथ लगती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य जन्म सरल है, पर मनुष्यता कठिन प्रयत्न करके कमानी पड़ती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर सर्वव्यापी दिव्य चेतना को कहते हैं, जो श्रेष्ठता के रूप में मानव अन्तःकरण को विकसित करती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पढ़ना, ज्ञान के नेत्र खोलने के लिए होता है;  नौकरी के लिए नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अच्छे काम का प्रयोग अपने से ही आरम्भ करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आशा की ज्योति कभी बुझने न दें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी का गौरव चौके- चूल्हे तक सीमित रहने में नहीं है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चरित्र निर्माण ही मनुष्य का धर्म है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् का हो जाने का अर्थ है- स्वयं को उनके प्रति समर्पित कर देना, उनसे भिन्न इच्छाएँ न रखना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार का सबसे बड़ा बल आत्मबल गायत्री साधक को प्राप्त होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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