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  • संस्कारवान् माताएँ ही उन्नत समाज का निर्माण करती हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर का प्यार केवल सदाचारी और कर्त्तव्यपरायणों के लिए सुरक्षित है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार में तीन सम्मान सबसे बड़े हैं, सन्त, सुधारक और शहीद।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अशुभ चिन्तन छोड़िये, भय मुक्त होइये।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्यवादी वह है, जो स्वयं में विश्वास नहीं करता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बहुमूल्य वर्तमान का सदुपयोग कीजिए।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिसने शिष्टता और नम्रता नहीं सीखी, उनका बहुत सीखना भी व्यर्थ रहा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बुद्धिमान् वह है, जो किसी को गलतियों से हानि होते देखकर अपनी गलतियाँ सुधार लेता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अन्तःकरण को अशुद्ध वासनाओं से बचाइए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर की कृपा और जीव का पुरुषार्थ मिलकर असंभव कार्य को संभव बना देते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपनी प्रशंसा आप न करें; यह कार्य आपके सत्कर्म स्वयं करा लेंगे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा स्वार्थ नहीं, परमार्थ का समर्थक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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