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  • उपासना सच्ची तभी है, जब जीवन में ईश्वर घुल जाए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ऊँचे उठो, प्रसुप्त को जगाओ, जो महान् है उसका अवलम्बन करो और आगे बढ़ो

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ‘‘हिन्दू धर्म विश्व धर्म बनेगा और वेद मंत्रों से ब्रह्माण्ड गूँजेगा। भारत विश्व का मार्गदर्शक बनेगा।’’


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों की निन्दा और त्रुटियाँ सुनने में अपना समय नष्ट मत करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    असुरता के विरुद्ध विवेक की प्रतिक्रिया का नाम है- युग निर्माण योजना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी गुण -सौन्दर्य बढ़ाएँ, आभूषण नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अध्यात्म एक नकद धर्म है, जिसे मात्र आत्मशोधन की तपश्चर्या से ही भुनाया जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सबसे बड़ी कोई सहायता है तो वह है कठिनाई के वक्त किसी की मदद करना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गन्दे फूहड़ चित्र हटाओ, माँ- बहिनों की लाज बचाओ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गंदे चित्र लगाओ मत, नारी को लजाओ मत।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कीर्ति वही स्थायी है, जो सत्कार्यों द्वारा प्राप्त की जाती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान कहीं से, किसी से, किसी मूल्य पर मिले; लेना अच्छा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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