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  • अपने आपको सुधार लेने पर संसार की हर बुराई सुधर सकती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों की निन्दा और त्रुटियाँ सुनने में अपना समय नष्ट मत करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्य बनाना अपने हाथ की बात है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    डाँ. ऐनीबेसेण्ट- "किसी भी राष्ट्र का निर्माण अकेले पुरुष पर नहीं हो सकता। राष्ट्र की स्त्रियाँ पत्नी- रूप में अपने पतियों को साहस प्रदान करती है तथा मातृ रूप से भावी संतति को इस प्रकार शिक्षित करती हैं, जिससे कि वह स्वतन्त्रता, आत्म सम्मान और आचरण की उच्चता के लिए किए गये हमारे प्रयत्नों का अनुगमन कर सके। कोई भी पक्षी एक पंख से नहीं उड़ सकता, इसी प्रकार कोई भी राष्ट्र स्त्री और पुरुष दोनों में से किसी एक वर्ग के द्वारा उन्नत नहीं हो सकता।‘‘


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    देवी जोन- "मैं अपने स्वदेश को दासत्व से मुक्त करूँगी। पराधीन देश में वैवाहिक जीवन तथा आमोद- प्रमोद की बात सोचना अपराध है।‘‘


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    यदि तारे आकाश की सुषमा- शोभा है, तो नारी इस धरित्री की।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपना मूल्य समझो और विश्वास करो कि तुम संसार के महत्त्वपूर्ण व्यक्ति हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शान्तिकुंज एक क्रान्तिकारी विश्वविद्यालय है। अनौचित्य की नींव हिला देने वाली यह संस्था प्रभाव पर्व की एक नवोदित किरण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान के अभाव में मनुष्य अन्धा रहता है और कर्म के अभाव में पंगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सच्चे उपदेशक वाणी से नहीं, जीवन से सिखाते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चरित्र हमारे अन्तर का दीपक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर को चापलूसी नहीं, श्रेष्ठ कार्य पसन्द है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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