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  • हँसते- हँसाते रहो, पर यह कार्य व्यंग्य- उपहास के आधार पर मत करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो आस्तिक है, उसकी आशा कभी क्षीण नहीं हो सकती।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों के साथ वह व्यवहार न करो, जो तुम्हें अपने लिए पसन्द नहीं।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनोविकारों से परेशान, दुःखी, चिंतित मनुष्य के लिए उनके दुःख- दर्द के समय श्रेष्ठ पुस्तकें ही सहारा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शिक्षक नई पीढ़ी के निर्माता होते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अहंकारी व्यक्ति का एक भी सच्चा मित्र इस संसार में नहीं है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आनन्द की गंगोत्री अपने भीतर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ऐसा साहस ही अध्यात्म है, जो आदर्श जीवन जीने की गति- विधियों का निर्माण करे और उसी रास्ते पर उत्साहपूर्वक घसीट ले चले।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्यवादी ऐसे पंगु है, जो दूसरों के कंधों पर चलता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वे प्रत्यक्ष देवता हैं, जो कर्तव्य पालन के लिए मर मिटते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शील ही नारी की शोभा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार में रहने का सच्चा तत्त्वज्ञान यही है कि रोजाना एक बार खिलखिलाकर जरूर हँस लें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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