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  • फूलों की तरह हँसते- मुस्कराते जीवन व्यतीत करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शान्तिकुंज एक विश्वविद्यालय है। कायाकल्प के लिए बनी एक अकादमी है। हमारी सतयुगी सपनों का महल है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हर परिस्थिति में प्रसन्न रहिए, निर्भय रहिए और कर्तव्य करते रहिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान का अंतिम लक्ष्य चरित्र निर्माण ही है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सज्जनों की कोई भी साधना कठिनाइयों में से होकर निकलने पर ही पूर्ण होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सदैव नम्रता, मधुरता, सज्जनता, उदारता एवं सहृदयता का व्यवहार करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान जीवन का प्रकाश बिन्दु है, जो मनुष्य को सभी द्वन्द्वों, उलझनों, अन्धकारों से निकालकर शाश्वत पथ पर अग्रसर करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वे प्रत्यक्ष देवता हैं, जो कर्तव्य पालन के लिए मर मिटते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परम्पराओं की तुलना में विवेक को महत्त्व दें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    समाज सुधार सुशिक्षितों का अनिवार्य धर्म - कर्तव्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा ज्ञानस्वरूप है। विचार और ज्ञान के रूप में ही वह मानवीय अंतःकरण में प्रकाश और प्रेरणा उत्पन्न करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य को वही मिलता है जैसे उसके विचार होते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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