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  • बुरे आदमियों में से भी अच्छाई ढूँढ़े।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    श्रम और तितिक्षा से शरीर मजबूत बनता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दुनिया की निन्दा स्तुति की परवाह मत करो। हृदय टटोलो और उसकी आवाज सुनो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा की एकमात्र प्यास भावना की है। उसी के लिए प्राणी प्यासा फिरता है। पग- पग पर मरने वाला मनुष्य उसी सुधासार को पीकर अमर होता है। माता के, पत्नी के, बहिन के, पुत्री के चार थनों से नारी रूपी कामधेनु अपने बछड़े मनुष्य को इसी प्रेमामृत का पयपान कराती है और उसकी अतृप्ति को तृप्ति में बदल देती है।


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    जीवन एक कर्तव्य है, जिसे पूरी तरह निभाया जाए।



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    नारी के हैं रूप अनेक, ब्रह्मा विष्णु और महेश।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नर और नारी दोनों ही वर्ग वेदमाता गायत्री के कन्या और पुत्र हैं।


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    सद्विचार निर्माण के लिए यदि संसार का सारा धन खर्च हो जाये या सारा समय लग जाये तो भी उसे कुछ घाटे की बात नहीं माननी चाहिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्त्री के प्रति आसक्ति नहीं, उसकी दिव्यता के प्रति सम्मान का भाव रखें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी पुरुष की पूरक सत्ता है। वह मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है। उसके बिना पुरुष का जीवन अपूर्ण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हम अपना बड़प्पन अपने सद्गुणों से तोलें और दूसरों को बडा़ तभी मानें, जब उनमें उच्च आदर्श, श्रेष्ठ चरित्र और लोकसेवा की समुचित मात्रा को देखें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिसके पास कुछ भी कर्ज नहीं, वह बड़ा मालदार है।


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