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  • ज्ञान तीन प्रकार से मिल सकते हैं- मनन से, अनुसरण से और अनुभव से

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    किसी को गलत मार्ग पर ले जाने वाली सलाह मत दो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विचारों के परिमार्जन के लिए स्वाध्याय आवश्यक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईर्ष्या न करें, प्रेरणा ग्रहण करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    घमण्डी के लिए कोई ईश्वर नहीं। ईर्षालु का कोई पड़ोसी नहीं और क्रोधी का कोई मित्र नहीं।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सबसे बड़ा दीन- दुर्बल वह है, जिसका अपने ऊपर नियंत्रण नहीं।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपनी राह आप बनाएँ, ताकि सफलता के लक्ष्य तक पहुँचे, आसरा तकते रहने से तो निराशा ही हाथ लगती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन की कोई भी साधना कठिनाइयों में होकर निकलने पर ही पूर्ण होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिनकी तुम प्रशंसा करते हो, उनके गुणों को अपनाओ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपना सुधार संसार की सबसे बड़ी सेवा है ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वयं उत्कृष्ट बनने और दूसरों को उत्कृष्ट बनाने का कार्य आत्म कल्याण का एकमात्र उपाय है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दुर्गुणी का कभी कोई सच्चा मित्र नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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