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  • माता का स्थान स्वर्ग से भी ऊँचा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बल्ब के प्रकाश से सब कुछ देखा जाता है, किन्तु बिजली उससे नहीं देखी जा सकती, बल्ब का प्रकाशित होना ही बिजली का प्रमाण है। इसी प्रकार ईश्वर दीखता नहीं, पर जीव में चेतना होना ही उसका प्रमाण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी आद्यशक्ति की प्रतीक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नैतिकता, प्रतिष्ठाओं में सबसे अधिक मूल्यवान् है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कुशल माली बगीचे में खाद पानी के साथ साथ पौधों की काट- छाँट खर पतवार के निष्कासन की व्यवस्था बनाता है। व्यक्तित्व विकास के लिए विकृतियों का परिशोधन और सत्प्रवृत्तियों की स्थापना की दोहरी माली जैसी ही प्रक्रिया अपनानी होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    देवी जोन- "मैं अपने स्वदेश को दासत्व से मुक्त करूँगी। पराधीन देश में वैवाहिक जीवन तथा आमोद- प्रमोद की बात सोचना अपराध है।‘‘


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    प्रशंसा और प्रतिष्ठा वही सच्ची है, जो उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्राप्त हो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्त्रियों का गौरव लज्जाशीलता में है।


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    भलमनसाहत का व्यवहार करने वाला एक चमकता हुआ हीरा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पूर्वजों की स्मृति में वृक्ष लगाना एक उच्च कोटि का श्राद्ध- तर्पण है।


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    आत्मा के सन्तोष का ही दूसरा नाम स्वर्ग है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य शरीर में प्रसुप्त देवत्व का जागरण करना ही आज की सबसे बडी़ ईश्वर पूजा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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