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  • ईर्ष्या से नहीं, अध्यवसाय से हम ऊँचे उठ सकते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् अनुभव से ही समझ में आते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बाहर के कौतूहलों को देखने भर से किसी की प्यास नहीं बुझती। देखने योग्य भीतर है। उसी को खोजो और भावनापूर्वक देखो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    किसने कितनी उन्नति की इसकी सच्ची कसौटी यह है कि उस मनुष्य के दृष्टिकोण और स्वभाव में कितना परिष्कार हुआ?


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् जाति- पाँति को नहीं, कर्म को देखते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बहिरंग ही नहीं, अंतरंग को बदलने वाले गुरुकुल- आरण्यक है ‘गायत्री तीर्थ शान्तिकुंज


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भावपूर्ण प्रार्थना निरर्थक नहीं होती।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अन्धकार में भटकते मनुष्यों को ज्ञान की दिव्य दृष्टि देना अन्धों को आँख देने के समान है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हर परिस्थिति में प्रसन्न रहिए, निर्भय रहिए और कर्तव्य करते रहिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जागो शक्ति स्वरूपा नारी, तुम हो दिव्य क्रान्ति चिनगारी।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो आदर्श जीवन बनाने और बिताने के लिए जितना इच्छुक, आतुर एवं प्रयत्नशील हैं, वह उतने ही अंशों में आस्तिक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बल्ब के प्रकाश से सब कुछ देखा जाता है, किन्तु बिजली उससे नहीं देखी जा सकती, बल्ब का प्रकाशित होना ही बिजली का प्रमाण है। इसी प्रकार ईश्वर दीखता नहीं, पर जीव में चेतना होना ही उसका प्रमाण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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