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    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वच्छ मन मानव जीवन की सबसे बड़ी सम्पदा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर उपासना की सर्वोपरि सब - रोगनाशक औषधि का आप नित्य सेवन करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्म- निर्माण का ही दूसरा नाम भाग्य निर्माण है।


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    ज्ञान तीन प्रकार से मिल सकते हैं- मनन से, अनुसरण से और अनुभव से


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मानवता की यही पुकार, रोको नारी अत्याचार।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विद्यालय राष्ट्र के जाग्रत् मन्दिर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य जीवन कर्मप्रधान है। भाग्य भी कर्म का ही प्रति- फल है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कर्तव्यशील मनुष्य ही धार्मिक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् को वस्तुओं की नहीं, श्रेष्ठ भावनाओं की चाह होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आशा और पुरुषार्थ को न छोड़ना आस्तिकता का प्रथम चिह्न है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वे माता- पिता धन्य हैं, जो अपनी संतान के लिए उत्तम पुस्तकों का एक संग्रह छोड़ जाते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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