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  • नैतिकता, प्रतिष्ठाओं में सबसे अधिक मूल्यवान् है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पर्दा प्रथा नारीत्व का अपमान है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    लोग प्रशंसा करते है या निन्दा इसकी चिन्ता छोड़ो। सिर्फ एक बात सोचो कि ईमानदारी से जिम्मेदारियाँ पूरी की गईं या नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अनासक्त जीवन ही शुद्ध और सच्चा जीवन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विवेक एवं ज्ञान भारतीय संस्कृति की आत्मा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बुद्धि वैभव चमत्कारी तो है पर हृदय की विशालता से बढ़कर उसकी गरिमा है नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आलस्य में समय न गँवाए


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा जिसके जीवन में कोई विशेष अभ्युदय- अनुग्रह करना चाहता है, उसकी बहुत- सी सुविधाओं को समाप्त कर दिया करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    व्यसनों के वश में होकर अपनी महत्ता को खो बैठे वह मूर्ख है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान समुद्र की भाँति अनन्त और अगाध है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वाधीन मन मनुष्य का सच्चा सहायक होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    समय का सदुपयोग ही उन्नति का मूलमंत्र है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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