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  • ईश्वर के सभी पुत्र समान हैं। वह अधिक प्यार केवल अधिक संयमी और अधिक सेवाभावी को कर सकता है, वंश के आधार पर कोई उसका प्रतिनिधि नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शरीर भगवान् का मंदिर है, इसमें आत्मा का निरन्तर निवास है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परमात्मा को पाने के लिए परमात्मा जैसी पवित्रता अभीष्ट है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मबल इस संसार का सबसे बड़ा बल है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    छिद्रान्वेषण त्यागकर गुण अन्वेषण का स्वभाव बनाएँ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो टूटे को बनाना और रूठे को मनाना जानता है, वही बुद्धिमान् है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो मन का गुलाम है, वह ईश्वर भक्त नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वह मत करो, जिसके लिए पीछे पछताना पड़े।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    श्रेष्ठ व्यक्तित्वों के गढ़ने की टकसाल है- युगतीर्थ शान्तिकुंज।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वाधीन मन मनुष्य का सच्चा सहायक होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने दोषों की ओर से अनजान रहने से बढ़कर प्रमाद और कोई नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पेट की भूख से बड़ी है, आत्मा की भूख।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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