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  • बुद्धिमान् वह है, जो किसी की गलतियों से हानि होते देखकर अपनी गलतियाँ सुधार लेता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पारिवारिक सुख- शान्ति का मूल है- सुव्यवस्था, आर्थिक सुनियोजन एवं उपलब्ध साधनों का बुद्धिमानीपूर्वक सदुपयोग।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हर मनुष्य का भाग्य उसकी मुट्ठी में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शरीर भगवान् का मंदिर है, इसमें आत्मा का निरन्तर निवास है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य ऋषियों, तपस्वियों, मनस्वियों और मनीषियों का वंशधर है ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुरुष से पुरुषोत्तम, नर से नारायण बनने का अभ्यास ही उपासना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    निर्धनता मनुष्य के लिए बेइज्जती का कारण नहीं हो सकती। यदि उसके पास वह सम्पत्ति मौजूद हो, जिसे 'सदाचार्' कहते है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कलाकार अपने आपको साधता है, किन्तु परिवार निर्माता को एक समूचे समुदाय के, विभिन्न प्रकृति और स्थिति के लोगों का निर्माण करना पड़ता है। इसके लिए धरती जैसी सहनशीलता, पर्वत जैसा धैर्य धारण और सूर्य जैसी प्रखरता का समन्वय सँजोना पड़ता है। इन सद्गुणों के अभाव में सुसंस्कृत- सुसंस्कारी परिवार के निर्माण का संयोग असंभव है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवात्मा का परमात्मा से जुड़ जाने का नाम योग है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वर्ग और नरक अपने घर में ही देखना चाहो तो मुसकान में स्वर्ग उतरना और विग्रह के साथ जुड़ा हुआ नरक कभी भी प्रत्यक्ष देख लें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी की अवमानना का अर्थ है- अपनी उद्गम शक्ति की गरिमा को गिराना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चरित्र का अर्थ है- अपने महान् मानवीय उत्तरदायित्वों का महत्त्व समझना और उसकी हर कीमत पर निर्वाह करना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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