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  • सत्य अकेला नहीं प्रेम और न्याय को भी साथ लेकर चलता है। इसी प्रकार असत्य के साथ पतन और विग्रह के सहचरों की जोड़ी चलती है.

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बिगड़ी क्यों भारत की साख, भीख माँगते अस्सी लाख।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हँसते- हँसाते रहो, पर यह कार्य व्यंग्य- उपहास के आधार पर मत करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उत्कृष्टता- आदर्शवादिता का समन्वय मात्र पूजा करने से नहीं, आत्मा को परमात्मा के साँचे में ढाल लेने से सम्भव है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    असत् से सत् की ओर, अंधकार से आलोक की और विनाश से विकास की ओर बढ़ने का नाम ही साधना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    असफलता हमें भूलों पर विचार करने का मौका देती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य मात्र का यह कर्तव्य है कि वह परम आध्यात्मिक शक्ति के रूप में माँ की प्रतिष्ठा प्रदान करें, प्रत्येक नारी में भाव वत्सला नारी का रूप देखें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन उसी का सार्थक है जो सदा परोपकार में प्रवृत्त है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विश्वास सफल जीवन का मूलमंत्र है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मानुशासन और आत्म - संतुलन का अभ्यास ही योग साधना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    एक सत्य का आधार ही व्यक्ति को भवसागर से पार कर देता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आलस्य से आराम मिल सकता है, पर यह आराम बड़ा महँगा पड़ता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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