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  • बिना परिश्रम का धन किसी के लिए भी उपयोगी नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    रोग छोटा हो तो भी उससे सतर्क रहना आवश्यक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुरुष- स्त्री वस्तुतः समान हैं। एक ही रथ के दो पहिए हैं। उसमें से न कोई छोटा है, न बड़ा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो असंभव कार्य को सम्भव करके दिखाए, उसे ही ‘प्रतिभा’ कहते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हर मनुष्य अपने स्तर की दुनिया अपने हाथों आप रचता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भलमनसाहत का व्यवहार करने वाला एक चमकता हुआ हीरा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    राष्ट्रों की सम्पत्ति तो सद् गुणी मनुष्य ही है- रेशम, कपास या स्वर्ण नहीं।


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    मनुष्य का अपने आपसे बढ़कर न कोई शत्रु है, न मित्र।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन का हर क्षण उज्ज्वल भविष्य की संभावना लेकर आता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस दिन आप स्वाध्याय नहीं करते वह अच्छा दिन नहीं होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भाग्यवादी वह है, जो दूसरों के कंधों पर चलता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने दोषों की ओर से अनजान रहने से बढ़कर प्रमाद और कोई नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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