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  • जिस दिन आप स्वाध्याय नहीं करते वह अच्छा दिन नहीं होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपासना सच्ची तभी है, जब जीवन ईश्वरमय हो जाये।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विचारों के परिमार्जन के लिए स्वाध्याय आवश्यक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी का गुण लज्जा, भय या संकोच नहीं; बल्कि विनय, आत्म- श्रद्धा, निर्भयता, शुचिता और आत्म सौन्दर्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन एक पाठशाला है, जिसमें अनुभवों के आधार पर हम शिक्षा प्राप्त करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन का नन्हा क्षण भी निरर्थक नष्ट न हो जाय।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जाग्रत् आत्मा का लक्षण है- सत्यम्, शिवम् और सुन्दरम् की ओर उन्मुखता

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भावना से कर्तव्य बड़ा होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सत्य में हजार हाथियों के समान बल होता है, इसलिए अन्तिम विजय उसी की होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आशावादी हर कठिनाइयों में भी अवसर देखता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सच्चा आनन्द उसे मिलता है, जिसने अपने मन को जीत लिया। मन को जीतने का अर्थ है- उसे कुमार्ग पर चलने से मोड़कर सन्मार्ग में प्रवृत्त कर देना। मन के सन्मार्ग पर चलने की पहचान है- गुण, कर्म, स्वभाव में सहिष्णुता की वृद्धि होना, सद्विचारों, सद्भावनाओं, सत्प्रवृत्तियों एवं सत्कर्मों का बढ़ना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    साधना का अर्थ है- कठिनाइयों से संघर्ष करते हुए भी सत्प्रयास जारी रखना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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