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  • मनुष्य के पास अपना कहलाने वाला जो कुछ है, वह नारी का अनुदान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उत्कृष्ट जीवन का स्वरूप है- दूसरों के प्रति नम्र और अपने प्रति कठोर होना।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगिनी निवेदिता-  "निखिल विश्व में नारियाँ ही मानवों के नैतिक आदर्शों की संरक्षिका है।‘‘


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्भावनाओं से खाली हृदय श्मशान की तरह सूना और भयंकर बना रहता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कठिनाइयाँ जब आती हैं तो कष्ट देती हैं, पर जब जाती है तो आत्म बल का ऐसा उत्तम पुरस्कार दे जाती हैं जो उन कष्टों दुखों की तुलना में हजारों गुना मूल्यवान होता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपनी ही नजर में जो गिर गया, वह सैकड़ों के उठाये नहीं उठ सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शारीरिक गुलामी से बौद्धिक गुलामी भयंकर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अज्ञान और कुसंस्कारों से छूटना ही मुक्ति है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य का अपने आपसे बढ़कर न कोई शत्रु है, न मित्र।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जाग्रत आत्मा का लक्षण है- सत्यम्, शिवम् और सुंदरम् की ओर उन्मुखता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर दिव्य चेतना है, अतः सद्गुणों और सत्प्रवृत्तियों के रूप में ही उसे देखा जा सकता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य की आत्मा में जो श्रेष्ठता है, वह कभी मर नहीं सकती।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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