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    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अन्धकार में भटकते मनुष्यों को ज्ञान की दिव्य दृष्टि देना अन्धों को आँख देने के समान है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सच को झूठ से और झूठ को सच से पृथक करने वाली जो विवेक बुद्धि है, उसी का नाम ज्ञान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आशावाद और ईश्वरवाद एक ही रहस्य के दो नाम हैं।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    किसने कितनी उन्नति की इसकी सच्ची कसौटी यह है कि उस मनुष्य के दृष्टिकोण और स्वभाव में कितना परिष्कार हुआ?


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    बड़प्पन शालीनता से मिलता है। पद और प्रतिष्ठा तो उसे चमकाते भर हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    फल की आतुरता प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् के काम में लग जाने वाले कभी घाटे में नहीं रह सकते।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    प्रसन्न रह सकना इस संसार का बहुत बड़ा सुख है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    झूठ बोलना एक छोटी किन्तु बहुत बुरी आदत है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शान्तिकुंज नैतिक, बौद्धिक और सामाजिक क्रान्ति का नालन्दा- तक्षशिला विश्वविद्यालय है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी का स्वरूप स्फटिक मणि की तरह स्वच्छ है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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