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  • भगवान् अनुभव से ही समझ में आते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सौन्दर्य फैशन में नहीं, बल्कि हृदय के आदर्श गुणों में है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    खाली बैठे मनुष्य का दिमाग शैतान का कारखाना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपना स्वर्ग स्वयं ही बनाएँ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चरित्र है तो सभी कुछ है, चरित्र नहीं तो कुछ भी नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् को मनुष्यों के दुर्गुणों में सबसे अप्रिय अहंकार है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शिक्षक राष्ट्र मंदिर के कुशल शिल्पी हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धोबी का व्यवसाय है- दूसरों के मैले कपड़ों को बटोरना और उन्हें धुले हुए चमकदार वापस करना। सन्त और सुधारक ऊँची किस्म के धोबी हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वर्ग और नरक अपने घर में ही देखना चाहो तो मुसकान में स्वर्ग उतरना और विग्रह के साथ जुड़ा हुआ नरक कभी भी प्रत्यक्ष देख लें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान और आचरण में जो सामंजस्य पैदा कर सके, उसे ही विद्या कहते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी की गरिमा कलंकित न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विद्यालय राष्ट्र के जाग्रत् मन्दिर हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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