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  • जागो शक्ति स्वरूपा नारी, तुम हो दिव्य क्रान्ति चिनगारी।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कीर्ति वही स्थायी है, जो सत्कार्यों द्वारा प्राप्त की जाती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    माता से बड़ा और कोई देवता नहीं है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपने दृष्टिकोण को उत्कृष्टता के साथ जोड़ देना योग है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन में दो ही व्यक्ति असफल होते हैं, जो सोचते हैं, पर करते नहीं। दूसरे वे जो करते तो हैं, पर सोचते नहीं। 


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सब प्राणियों में भगवान् हैं

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी आद्यशक्ति की प्रतीक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिन्दादिली, उत्साह, माधुर्य, जोश और शक्ति ही हमें जीने योग्य बनाते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मन की निर्मलता और स्वभाव की पवित्रता ही नारी का सच्चा श्रृंगार है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् दिव्य चेतना के रूप में हैं, उन्हें बिना बताये ही सब कुछ मालूम रहता है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्गुण है सच्ची संपत्ति, दुर्गुण सबसे बड़ी विपत्ति।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सत्कर्म ही मनुष्य का कर्तव्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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