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  • ऊँचे उठो, प्रसुप्त को जगाओ, जो महान् है उसका अवलम्बन करो और आगे बढ़ो


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उच्च विचार सेना से अधिक बलवान् हैं। जिसके पास सिद्धान्तों की शक्ति है, वह कहीं भी हारता नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परिवार की सेवा करना संसार की सेवा करना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शुभ कार्यों के लिए हर दिन शुभ और अशुभ कार्यों के लिए हर दिन अशुभ है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विषयों, व्यसनों और विलासों में सुख खोजना और पाने की आशा करना एक भयानक दुराशा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आज का काम कल पर मत टालो



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्वाध्यायन्मा प्रमदः!  अर्थात् स्वाध्याय में प्रमाद न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मात्र हवन, धूपबत्ती और जप की संख्या के नाम पर प्रसन्न होकर आदमी की मनोकामना पूरी कर दिया करें, ऐसे देवी- देवता दुनिया में कहीं नहीं है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    किसी सदुद्देश्य के लिए जीवन भर कठिनाइयों से जूझते रहना ही महापुरुष होना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् शरीररहित है, किन्तु शरीरों में भगवान् की शक्ति अवतरित होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दुष्टों का वैभव बढ़ते देखकर ललचाओं मत। वे गुब्बारे की तरह फूलते और बबूले की तरह फूटते रहते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सत्कर्मपरायण आत्माएँ परमात्मा के ही समतुल्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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