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  • कर्मयोग ही संसार में ऊँचा उठने का श्रेष्ठ साधन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    इस युग की सबसे बड़ी शक्ति शस्त्र नहीं, सद्विचार है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जिस भी समुदाय में स्वाभिमानी, सुसंस्कृत, श्रमशील नारी विद्यमान होती है, वह समाज निश्चित ही प्रगति करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्बुद्धि रूपी प्रसन्नता हमारे अन्तर में छिपी पडी़ है, उसे प्रेरित- प्रसन्न करते ही कष्टों की निशा समाप्त हो जाती है और आनन्द रूपी सूर्य की किरणें अपने चारों ओर बिखरी हुई दिखाई पड़ती हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विद्या का दान सर्वोत्कृष्ट दान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर को प्रसन्नता की जरूरत नहीं, वह हमारी चाटुकारिता का भूखा नहीं। हम उनकी प्रशंसा करते हैं- स्तुति करते हैं तो इसलिए कि सद्गुणों के समुच्चय- परमात्मा के गुणों को अपने अन्दर धारण करें।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उनसे दूर रहो, जो भविष्य को निराशाजनक बताते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अन्धकार में भटकते मनुष्यों को ज्ञान की दिव्य दृष्टि देना अन्धों को आँख देने के समान है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी के पास सबसे आदरणीय सम्पत्ति है, उसका सतीत्व।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नशा बहुत बड़ा दुर्व्यसन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर उपासना आत्मा की वैसी ही आवश्यकता है, जैसी शरीर को प्राण की।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हमारा हर क्षण सार्थक, श्रेष्ठ एवं उपयोगी कार्यों में लगे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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