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  • गृहस्थ धर्म जीवन का एक पुनीत, आवश्यक एवं उपयोगी अनुष्ठान है। आत्मोन्नति करने के लिए वह एक प्राकृतिक, स्वाभाविक और सर्वसुलभ योग है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी कामधेनु है। जब उसे हम मातृ बुद्धि से देखते हैं तो वह हमें देवत्व प्रदान करती है, पर जब उसे वासना, सम्पत्ति, दासी की दृष्टि से देखा जाता है, तो वह हमारे लिए अभिशाप बन जाती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान का अंतिम लक्ष्य चरित्र निर्माण ही है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर के यहाँ देर है, अन्धेर नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार का हर प्राणी अपने आत्म- कल्याण के लिए आप उत्तरदायी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    स्त्री, पुरुष की परस्परावलम्बी हो, आश्रित नहीं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान की सार्थकता तभी है, जब वह आचरण में आए ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शिक्षक नई पीढ़ी के निर्माता होते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान का अंतिम लक्ष्य चरित्र निर्माण ही है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान जीवन का प्रकाश बिन्दु है, जो मनुष्य को सभी द्वन्द्वों, उलझनों, अन्धकारों से निकालकर शाश्वत पथ पर अग्रसर करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी आद्यशक्ति की प्रतीक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    समय की कद्र करो, एक मिनट भी फिजूल मत गँवाओ


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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