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    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्बुद्धि संसार का सबसे मूल्यवान् धन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    तलवार की कीमत म्यान से नहीं, बल्कि धार से होती है। इसी प्रकार मनुष्य की कीमत धन से नहीं सदाचार से ऑंकी जाती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन के चिह्न हैं- प्रेरणा, स्फूर्ति, उत्साह, लगन और प्रसन्नता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परिवार संस्था ही नर -  रत्नों की खदान बन सकती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सबकी मंगल कामना करो, इससे आपका भी मंगल होगा।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् भावना की उत्कृष्टता को ही प्यार करता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् भावना की उत्कृष्टता को ही प्यार करता है।

    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सद्विचारों का क्रियात्मक रूप ही सेवा है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी व्यक्ति, समाज तथा राष्ट्र की जननी ही नहीं, वह जगज्जननी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दूसरों की निन्दा और त्रुटियाँ सुनने में अपना समय नष्ट मत करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    खरे बनिए, खरा काम कीजिए और खरी बात कहिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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