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  • जब तक हम ईश्वर की बताई राह पर चलते हैं वह हमारी सहायता करता है। जब कुमार्ग पर चलते हैं तो मुसीबतों में फँसा कर झिड़क देता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दुनिया में भलमनसाहत का व्यवहार करने वाला एक चमकता हुआ हीरा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मानुशासन और आत्म- संतुलन का अभ्यास ही योग साधना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर उपासना की सर्वोपरि सब - रोगनाशक औषधि का आप नित्य सेवन करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    संसार में विद्या से बढ़कर कोई मित्र नहीं और अविद्या से बढ़कर कोई शत्रु नहीं ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हर परिस्थिति में प्रसन्न रहिए, निर्भय रहिए और कर्तव्य करते रहिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हम बदलेंगे तो हमारी दुनिया भी बदलेगी।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    एक पिता की सब संतान, नर और नारी एक समान।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर भक्ति का अर्थ है- आदर्शों के प्रति असीम प्यार।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ध्यान का अर्थ मात्र एकाग्रता ही नहीं, श्रेष्ठ विचारों की तन्मयता भी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    दिनचर्या को व्यवस्थित बना देना आरोग्य की गारंटी है। 


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अनुशासन का उल्लंघन न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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