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  • धैर्य, अनुद्वेग, साहस, प्रसन्नता, दृढ़ता और समता की संतुलित स्थिति सदैव बनाये रखें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नशा बहुत बड़ा दुर्व्यसन है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आनन्द की गंगोत्री अपने भीतर है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हम दूसरों से भिन्न नहीं और दूसरे हमसे भिन्न नहीं, इसी मान्यता में अध्यात्मवाद का सारा रहस्य सन्निहित है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सौन्दर्य फैशन में नहीं, वरन् हृदय के आदर्श गुणों में है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सत्साहित्य सत्पुरुषों का मूर्तिमान हृदय एवं मस्तिष्क है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मानवता की सेवा से बढ़कर और कोई काम बड़ा नहीं हो सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    शील ही नारी की शोभा है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगिनी निवेदिता-  "निखिल विश्व में नारियाँ ही मानवों के नैतिक आदर्शों की संरक्षिका है।‘‘


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पालतू पशुओं को बन्धन में बँधकर रहना पड़ता है, मनुष्य को यह सुविधा प्राप्त है कि स्वतन्त्र जीवन जिए और इच्छित परिस्थितियों का वरण करे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    निर्धनता मनुष्य के लिए बेइज्जती का कारण नहीं हो सकती। यदि उसके पास वह सम्पत्ति मौजूद हो, जिसे सदाचार् कहते है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जहाँ सद्गुण रहते हैं, भगवान् वहीं निवास करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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