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  • बहादुरी का अर्थ है हिम्मत भरी साहसिकता, निर्भीक पुरुषार्थ परायणता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    खर्चीली शादियाँ हमें दरिद्र और बेईमान बनाती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् जिसे अपनी शरण में लेते हैं, जिसे बन्धन मुक्त करना चाहते हैं, उसके अनिवार्य कर्म भोगों को जल्दी- जल्दी भुगतवा कर उसे ऐसा ऋण मुक्त बना देते हैं कि भविष्य के लिए कोई बन्धन शेष न रहे और भक्त को फिर जन्म- मरण के चक्र में न पड़ना पडे़


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आशा की ज्योति कभी बुझने न दें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    एक सत्य का आधार ही व्यक्ति को भवसागर से पार कर देता है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हम क्या करते हैं, इसका महत्त्व कम है; किन्तु उसे हम किस भाव से करते हैं इसका बहुत महत्त्व है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्म निर्माण ही युग निर्माण है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    श्रेष्ठता प्राप्त करने का अभ्यास आवेश या अंधानुकरण पर आधारित न हो, अन्यथा अधिक देर तक उसमें टिके रहना संभव नहीं होता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आज के बच्चे कल के राष्ट्र निर्माता हैं।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपना सुधार संसार की सबसे बड़ी सेवा है ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    भगवान् शरीररहित है, किन्तु शरीरों में भगवान् की शक्ति अवतरित होती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी को स्वावलम्बी बनने दिया जाए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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