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  • अज्ञान ही मानव जाति का सबसे बड़ा शत्रु है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आदर्शों को ही देव कहते हैं। जो उत्कृष्ट आदर्शवादिता का परिपालन करता है, वही देव उपासक है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    निरक्षरता मनुष्य जीवन का बहुत बड़ा कलंक है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    गृहस्थ एक तपोवन है, जिसमें संयम, सेवा, त्याग और सहिष्णुता की साधना करनी पड़ती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ज्ञान का ध्येय सत्य है और सत्य ही आत्मा का लक्ष्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    धर्म शब्द का अर्थ है- धारणा। यहाँ धारणा से तात्पर्य उन आदर्शों की अंतरंग से प्रतिष्ठापना से है, जो व्यक्ति और समाज की श्रेष्ठता और सद्भावना की दिशा में प्रेरित करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मोत्कर्ष की सीढ़ी है ज्ञान।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सच को झूठ से और झूठ को सच से पृथक करने वाली जो विवेक बुद्धि है, उसी का नाम ज्ञान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ईश्वर विश्वासी और पुरुषार्थी व्यक्ति का मार्ग कोई नहीं रोक सकता।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    पुरुष से पुरुषोत्तम, नर से नारायण बनने का अभ्यास ही उपासना है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन एक पाठशाला है, जिसमें अनुभवों के आधार पर हम शिक्षा प्राप्त करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    चरित्र हमारे अन्तर का दीपक है, उसे सदैव प्रज्वलित रखें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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