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  • प्रयत्न से सांसारिक समृद्धि मिलती है, प्रयत्न से आत्मिक सम्पदायें मिलती हैं, प्रयत्न से परमात्मा मिलता है, इसलिए प्रयत्न ही प्रधान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जो महापुरुष बनने के लिए प्रयत्नशील है, वे धन्य हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नाऽकृत्वा सुखमेधते!
    अर्थात्- बिना कर्तव्य किये मनुष्य सुख नहीं प्राप्त करता |


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    हँसी- खुशी है जहाँ, तन्दुरुस्ती है वहाँ।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    वास्तविक सौन्दर्य के आधार हैं- स्वस्थ शरीर, निर्विकार मन और पवित्र आचरण।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मा की पुकार अनसुनी न करें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    सन्तोष और सादगी का पालन करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    कर्तव्य पालन में ही जीवन का सच्चा मूल्य है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    माता से बड़ा और कोई देवता नहीं है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नाक- कान छेदने और उनके चित्र- विचित्र लटकन लटकाने का, पिछड़ेपन का प्रतीक फैशन कोई महिला न अपनाए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    अपनी प्रशंसा आप न करें, यह कार्य आपके सत्कर्म स्वयं करा लेंगे।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    यदि भवसागर से पार होने की इच्छा है, तो सर्वप्रथम ज्ञान संचय का प्रयत्न करो।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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