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  • विषम क्षणों में भी स्वभाव को सुन्दर बनाये रखना साहस है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    उपलब्धियाँ इस संसार में भरी पड़ी हैं, पर उन्हें प्राप्त करने के लिए ज्ञान, चरित्र एवं साहस चाहिए।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    ध्यान का अर्थ मात्र एकाग्रता ही नहीं, श्रेष्ठ विचारों की तन्मयता भी है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    नारी के हाथ में संसार की समस्त निराशा और कटुता मिटाने की क्षमता विद्यमान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य बने रहने का अर्थ है- आत्म भावना का परिष्कार।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    परिवार में मतभेद होने पर भी अथवा परिहास में भी अशिष्टता को स्थान न दें।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    मनुष्य अपने सृजेता की तरह सामर्थ्यवान है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    विचार ही जीवन का निर्माण करते हैं।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    आत्मशुद्धि का प्रत्यक्ष चिह्न सेवा एवं परमार्थ में रुचि होना ही है।



    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    इक्कीसवीं सदी- नारी सदी।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    यदि मनुष्य सीखना चाहे, तो उसकी प्रत्येक भूल उसे कुछ न कुछ सिखा देती है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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    जीवन उसी का सार्थक है, जो सदा परोपकार में प्रवृत्त है।


    By Pandit Shriram Sharma Acharya
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